नेपाल में गुरुकुल शिक्षा की ओर बढ़ रहा युवाओं का रुझान, संस्कृत भाषा का पुनर्जागरण

Nepal में गुरुकुल शिक्षा और संस्कृत अध्ययन के प्रति विद्यार्थियों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। छात्रों के बढ़ते नामांकन के साथ संस्कृत भाषा के पुनर्जागरण की तस्वीर भी उभरकर सामने आ रही है।
दांग स्थित Nepal Sanskrit University के प्रोफेसर Guruprasad Suvedi के अनुसार, वर्तमान में देशभर में लगभग 25 हजार विद्यार्थी संस्कृत का अध्ययन कर रहे हैं। नेपाल में करीब 500 गुरुकुल संचालित हैं, जिनमें 300 पंजीकृत और 200 अपंजीकृत गुरुकुल शामिल हैं।
प्रोफेसर सुवेदी ने बताया कि इन गुरुकुलों में करीब 20 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। वहीं नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के आंगिक और संबद्ध महाविद्यालयों में 4,943 विद्यार्थी शास्त्री और आचार्य स्तर की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के प्रशासन प्रमुख Giriraj Sharma ने भी इन आंकड़ों की पुष्टि की।
तनहुँ और चितवन में फैले देवघाट क्षेत्र के Mahesh Sanskrit Gurukul, Parmanand Sanskrit Gurukul और Gargi Kanya Gurukul में वर्तमान में लगभग एक हजार विद्यार्थी संस्कृत की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
प्रोफेसर सुवेदी ने कहा कि पहले संस्कृत शिक्षा की स्थिति काफी कमजोर हो गई थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में प्रजातंत्र की स्थापना के बाद एक समय ऐसा भी आया था जब संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों को ढूंढना मुश्किल हो गया था, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं और विद्यार्थियों का रुझान लगातार बढ़ रहा है।
इस वर्ष देवघाट स्थित Harihar Sanyas Ashram में कक्षा 6 से 12 तक केवल 25 सीटों के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा में करीब 300 छात्र शामिल हुए। वहीं महेश संस्कृत गुरुकुल की प्रवेश परीक्षा में 200 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें से नए शैक्षणिक सत्र के लिए 33 छात्रों का चयन किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि संस्कृत और पारंपरिक गुरुकुल शिक्षा के प्रति बढ़ती रुचि नेपाल में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों के पुनर्स्थापन का संकेत है। साथ ही अभिभावकों का झुकाव भी अब वैदिक शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।






