नागपुर मेट्रो बनी ‘चलता-फिरता पावर हाउस’, ट्रैक पर सौर ऊर्जा उत्पादन करने वाली देश की पहली मेट्रो

महाराष्ट्र में Maharashtra Metro Rail Corporation की नागपुर मेट्रो ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल करते हुए खुद को “चलता-फिरता पावर हाउस” में बदल लिया है। मेट्रो ट्रैक के बीच की खाली जगह और पिलर्स पर सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन करने वाली यह देश की पहली मेट्रो प्रणाली बन गई है।
नागपुर मेट्रो के वरिष्ठ उपमहाप्रबंधक (कॉर्पोरेट संचार) अखिलेश हलवे के अनुसार, इस परियोजना से पर्यावरण संरक्षण को बड़ा फायदा होगा। केवल 50 किलोवॉट पीक (kWp) क्षमता वाले सौर प्रकल्प से हर साल करीब 64 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 2961 पूर्ण विकसित पेड़ों के बराबर माना जा रहा है।
भारत में अब तक अधिकांश मेट्रो परियोजनाओं में स्टेशनों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जाते रहे हैं, लेकिन रेल ट्रैक के बीच की जगह का उपयोग कर बिजली उत्पादन करने वाली नागपुर मेट्रो पहली परियोजना बन गई है। प्रबंधन का दावा है कि ट्रैक-माउंटेड सोलर सिस्टम लागू करने वाली यह दुनिया की पहली मेट्रो प्रणाली भी है।
जर्मनी से मिला निवेश, ‘जीरो इन्वेस्टमेंट मॉडल’ बना खास
इस परियोजना को ‘इंडो-जर्मन सोलर को-ऑपरेशन’ के तहत जर्मनी से करीब 200 करोड़ रुपये का निवेश मिला है। खास बात यह है कि नागपुर मेट्रो को इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी ओर से कोई पूंजी खर्च नहीं करनी पड़ी, जिसके कारण इसे ‘ज़ीरो इन्वेस्टमेंट मॉडल’ कहा जा रहा है।
मेट्रो प्रशासन ने अपनी कुल बिजली जरूरत का 50 से 65 प्रतिशत हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। खापरी, न्यू एयरपोर्ट और एयरपोर्ट साउथ मेट्रो स्टेशन पर बनने वाली अतिरिक्त बिजली को Maharashtra State Electricity Distribution Company Limited (महावितरण) को दिया जा रहा है, जिससे मेट्रो की आय भी बढ़ रही है।
यात्रियों को भी मिल सकता है फायदा
अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना से मेट्रो परिचालन खर्च में कमी आएगी, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों को भी मिल सकता है। इससे किराए में संभावित बढ़ोतरी को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।
महत्वपूर्ण आंकड़े
- वार्षिक बिजली उत्पादन: लगभग 70 हजार यूनिट
- परियोजना क्षमता: 50 kWp
- अनुमानित लागत: करीब ₹1 करोड़
- पेबैक अवधि: 4 वर्ष
- रखरखाव: महीने में दो बार
- कार्बन उत्सर्जन में कमी: 64 टन प्रति वर्ष
नागपुर मेट्रो के इस मॉडल की सफलता के बाद अब पुणे मेट्रो में भी ट्रैक पर सोलर पैनल लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। यह ‘ग्रीन मेट्रो मॉडल’ अब देश के अन्य शहरों के लिए भी सतत विकास का नया उदाहरण बनता जा रहा है।






