फर्जी यूनिवर्सिटी से सावधान! MP उच्च शिक्षा विभाग का बड़ा अलर्ट, छात्रों के लिए जागरूकता अभियान शुरू

फर्जी विश्वविद्यालयों और अवैध शिक्षण संस्थानों के बढ़ते जाल से विद्यार्थियों को बचाने के लिए मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के निर्देशों के तहत प्रदेशभर में जागरूकता अभियान शुरू किया गया है, ताकि छात्र और अभिभावक प्रवेश के दौरान किसी शैक्षणिक धोखाधड़ी का शिकार न हों।
उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों, सरकारी और गैर-सरकारी महाविद्यालयों व अन्य शिक्षण संस्थानों को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग का उद्देश्य विद्यार्थियों को फर्जी विश्वविद्यालयों और अवैध डिग्री देने वाले संस्थानों से सतर्क करना है।
जनसंपर्क अधिकारी राजेश दाहिमा ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान प्रवेश सत्र को देखते हुए UGC ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शैक्षणिक संस्थानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। आयोग के मुताबिक, कुछ संस्थान खुद को विश्वविद्यालय या उच्च शिक्षण संस्थान बताकर आकर्षक विज्ञापनों और भ्रामक दावों के जरिए छात्रों को भ्रमित कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ऐसे संस्थानों द्वारा दी गई डिग्रियां न तो उच्च शिक्षा में मान्य होंगी और न ही सरकारी या निजी रोजगार में उपयोगी साबित होंगी। UGC की 18 मार्च की सार्वजनिक सूचना में भी साफ किया गया है कि केवल विधिक मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय और संस्थान ही डिग्री प्रदान कर सकते हैं।
मान्यता प्राप्त संस्थान ही दे सकते हैं डिग्री
UGC अधिनियम 1956 के अनुसार, डिग्री केवल उन्हीं संस्थानों द्वारा दी जा सकती है जो राज्य, केंद्र या प्रांतीय अधिनियम के तहत स्थापित हों या UGC से अधिकृत हों। फर्जी संस्थानों से प्राप्त डिग्रियां किसी भी शैक्षणिक या रोजगार संबंधी उद्देश्य के लिए मान्य नहीं मानी जाएंगी।
प्रवेश से पहले ये जांच जरूर करें
उच्च शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को सलाह दी है कि किसी भी संस्थान में एडमिशन लेने से पहले उसकी UGC मान्यता जरूर जांचें। केवल विज्ञापन, सोशल मीडिया प्रचार या आकर्षक दावों के आधार पर प्रवेश न लें। यदि कोई संस्थान नियमों के विरुद्ध शैक्षणिक कार्यक्रम चला रहा हो, तो उसकी जानकारी संबंधित प्राधिकरण को दें।
विशेष रूप से कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि उच्च शिक्षा में प्रवेश के दौरान वे किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बच सकें। यह अभियान विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।






