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मप्र: गुढ़ में स्थापित शयन मुद्रा में कालभैरव की प्रतिमा, देश की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में शामिल

मध्य प्रदेश का विन्ध्य क्षेत्र प्राचीन मंदिरों, स्तूपों और मूर्तिकला के अद्भुत उदाहरणों से समृद्ध रहा है। इसी सांस्कृतिक विरासत का एक अद्वितीय उदाहरण गुढ़ तहसील के खामडीह गांव में स्थित भगवान शिव के उग्र स्वरूप कालभैरव की शयन मुद्रा में बनी विशाल प्रतिमा है, जिसे देश की सबसे बड़ी कालभैरव प्रतिमाओं में से एक माना जाता है।

यह प्रतिमा कैमोर पर्वत माला की गोद में स्थित है और अपने अद्भुत शिल्प, आकार और आध्यात्मिक प्रभाव के कारण श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

प्रतिमा की भव्यता और विशेषताएं

शयन मुद्रा में निर्मित इस कालभैरव प्रतिमा की लंबाई लगभग 8.5 मीटर और चौड़ाई 3.7 मीटर है। यह मूर्ति एक ही पत्थर को तराशकर बनाई गई है, जो प्राचीन भारतीय मूर्तिकला की असाधारण क्षमता को दर्शाती है। काले रंग के बलुआ पत्थर से बनी इस प्रतिमा में रौद्रता के साथ-साथ अद्भुत शांति का भाव झलकता है।

प्रतिमा चतुर्भुज स्वरूप में अंकित है—

  • दाहिने ऊपरी हाथ में त्रिशूल, जो सृष्टि के पालन और संहार का प्रतीक है।

  • निचले दाहिने हाथ में रुद्राक्ष माला, जो ध्यान और भक्ति का संकेत देती है।

  • ऊपरी बाएं हाथ में तीन शीषों वाला सर्प, जो त्रिशक्ति का प्रतीक माना जाता है।

  • बाएं हाथ में बीज और फल, जो उर्वरता और सृजन शक्ति को दर्शाते हैं।

कालभैरव भव्य मुकुट, कुंडल, हार और यज्ञोपवीत से अलंकृत हैं। प्रतिमा के चारों ओर चार परिचारिकाएं अंकित हैं—दो बैठी हुई और दो खड़ी मुद्रा में।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

जनसंपर्क अधिकारी उमेश तिवारी के अनुसार, यह प्रतिमा संभवतः 10वीं से 11वीं शताब्दी के बीच कल्चुरि काल में निर्मित कराई गई थी। वर्षों तक यह प्रतिमा खुले में स्थित रही, लेकिन अब शासन की एलएडी योजना के तहत यहां दो मंजिला भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है।

मंदिर परिसर में सामुदायिक भवन, आठ दुकानें और अन्य सुविधाएं भी विकसित की गई हैं, जिससे यह स्थान धार्मिक के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों का भी केंद्र बन रहा है।

आस्था और पर्यटन का केंद्र

यह प्रतिमा हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहां पूजा करने से रोग निवारण, भय मुक्ति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। मंदिर के चारों ओर का पथरीला ढालू क्षेत्र इसे प्राकृतिक सौंदर्य से भी समृद्ध बनाता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज शनिवार को आयोजित भव्य समारोह में इस मंदिर का लोकार्पण करेंगे। राज्य सरकार इस स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गुढ़ की यह कालभैरव प्रतिमा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि विन्ध्य क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक और शिल्प परंपरा का जीवंत प्रमाण भी है।

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