MP सरकारी नौकरी नियमों में बड़ा बदलाव: जुलाई से लागू हो सकते हैं नए नियम , दो से ज्यादा बच्चों वालों पर प्रतिबंध
मध्य प्रदेश सरकार सिविल सेवा नियमों में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 2026 का नया ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें सरकारी नौकरी के लिए दो से अधिक बच्चों की शर्त को बरकरार रखा गया है।
खास बात यह है कि पिछले वर्ष इसी प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था और उसे मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक सहमति भी मिल चुकी थी, लेकिन नए ड्राफ्ट में सरकार अपने पुराने फैसले पर कायम नजर आ रही है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सरकार ने सिविल सेवा नियमों में संशोधन कर दो से अधिक बच्चों वाले अभ्यर्थियों पर सरकारी नौकरी के लिए प्रतिबंध लागू किया था।
क्या कहता है दो बच्चों वाला नियम?
नए ड्राफ्ट के नियम 5 और 6 के तहत पात्रता और अपात्रता की शर्तें तय की गई हैं। इसके अनुसार- कोई भी उम्मीदवार जिसकी दो से अधिक जीवित संतानें हैं और उनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद हुआ है, वह सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होगा।
जुड़वां बच्चों के मामला में क्या करें
यदि किसी का पहले से एक बच्चा है और अगले प्रसव (डिलीवरी) में जुड़वां या उससे ज्यादा बच्चे होते हैं तो वह अपात्र नहीं माना जाएगा।
इन 4 परिस्थितियों में भी नौकरी के लिए होंगे अनुपयुक्तता
एक से अधिक जीवनसाथी: यदि किसी व्यक्ति का एक से अधिक जीवित जीवनसाथी है, तो वह अपात्र होगा (विशेष मामलों में छूट संभव)।
मेडिकल अनफिट: शारीरिक या मानसिक रूप से अनफिट पाए जाने पर नियुक्ति नहीं होगी।
चारित्रिक दाग: नैतिक अधोपतन या चारित्रिक मामलों से जुड़े अपराध में दोषी पाए जाने पर नौकरी नहीं मिलेगी।
बर्खास्त कर्मचारी: केंद्र, राज्य या स्थानीय निकाय से नौकरी से हटाए गए लोग अपात्र होंगे।
GAD की वेबसीटे पर 15 जून तक दे सकते हैं सुझाव
कर्मचारी संगठनों और आम जनता से सुझाव मांगे गए हैं। 15 जून तक GAD की वेबसाइट पर राय दी जा सकती है। सुझावों के बाद फाइनल ड्राफ्ट कैबिनेट की मंजूरी के लिए जाएगा और यह नियम इसी साल जुलाई से लागू हो सकते हैं।
इन परिस्तिथियों में सेवा समाप्त की जा सकती है
- कर्मचारी उपयुक्त शासकीय सेवाक नहीं पाए जाने पर।
- पद के लिए आवश्यक योग्यता या दक्षता नहीं हो।
- कार्य प्रदर्शन असंतोषजनक हो।
- विभागय परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की हो।
- नियुक्ति के समय महत्वपूर्ण तथ्य छिपाएं गए हो या गलत जानकारी दी गई हो।
