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मुंबई में मोदी–मैक्रों मुलाकात: भारत–फ्रांस संबंध ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ तक पहुंचे

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच अहम बैठक हुई। मुंबई के लोक भवन में वार्ता और संवाददाता सम्मेलन के बाद दोनों नेता एक ही कार में साथ नजर आए। राष्ट्रपति मैक्रों ने इस यात्रा की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए लिखा, “जय हो!”

संबंधों को मिली नई ऊंचाई

इस मुलाकात में भारत और फ्रांस ने अपने रिश्तों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ में बदलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। बैठक के दौरान रक्षा, तकनीक, स्टार्टअप, जरूरी खनिज, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में बड़े एलान किए गए।

रक्षा क्षेत्र में अहम फैसले

राष्ट्रपति मैक्रों के दौरे के दौरान रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली। कर्नाटक के वेमागल में ‘एच125 हेलीकॉप्टर फाइनल असेंबली लाइन’ का उद्घाटन हुआ, जिसे टाटा और एयरबस मिलकर संचालित करेंगे। यह भारत में निजी क्षेत्र की पहली हेलीकॉप्टर फैक्टरी होगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर ऐसा हेलीकॉप्टर बनाएंगे जो माउंट एवरेस्ट तक उड़ान भर सके। दोनों देशों ने हर वर्ष विदेश मंत्रियों के बीच वार्ता आयोजित करने का भी निर्णय लिया।

नवाचार और युवा सहयोग पर जोर

दोनों नेताओं ने मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर ‘इंडिया–फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ की आधिकारिक शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य तकनीक, स्टार्टअप, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है।

मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी को 2026 में फ्रांस की अध्यक्षता वाले 52वें G7 शिखर सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। उन्होंने शिखर सम्मेलन से पहले अंतरराष्ट्रीय एजेंडा पर समन्वय के लिए अस्थायी बैठक का प्रस्ताव भी रखा।

ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में फ्रांस यात्रा को याद करते हुए मार्सिले शहर का उल्लेख किया, जहां प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों ने बहादुरी दिखाई थी। उन्होंने वीर सावरकर के साहसिक प्रयास का भी स्मरण किया।

रक्षा संवाद में सहयोग का विस्तार

कर्नाटक के बेंगलुरु में आयोजित 6वें भारत–फ्रांस वार्षिक रक्षा संवाद में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत फ्रांस की रणनीतिक स्वायत्तता और मजबूत यूरोपीय रक्षा नीति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की सराहना करता है।

उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने रक्षा सहयोग समझौते को अगले 10 वर्षों के लिए नवीनीकृत किया है। साथ ही, हालिया भारत–यूरोपीय संघ सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी समझौते के जरिए क्षेत्रीय स्थिरता और संयुक्त क्षमताओं को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

भारत और फ्रांस के बीच यह नई पहल न केवल द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर दोनों देशों की भूमिका को भी और मजबूत बनाएगी।

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