ट्रंप का स्पष्ट संदेश: “अमेरिका अपने हित में फैसले लेगा”, 9 जुलाई के बाद आयात शुल्क पर बड़ा कदम संभव

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक मंच पर सख्त संदेश देते हुए कहा है कि अमेरिका वही करेगा जो उसके हित में होगा, भले ही दुनिया क्या सोचती है। उन्होंने संकेत दिया कि आयात टैरिफ की समयसीमा को बदला जा सकता है। फिलहाल, यह सीमा 9 जुलाई तक तय है, जिसके बाद या तो टैरिफ दोबारा लागू किए जा सकते हैं या समयसीमा बढ़ाई जा सकती है।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह तारीख अंतिम नहीं है और सब कुछ व्यापार वार्ताओं की प्रगति पर निर्भर करता है। गौरतलब है कि ट्रंप ने अप्रैल में अधिकांश विदेशी आयातों पर जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, लेकिन 10% से अधिक के टैरिफ पर 90 दिनों की छूट दी गई थी, जो 8 जुलाई को समाप्त हो रही है।

ट्रंप का स्पष्ट रुख
उन्होंने कहा, “अगर मेरा मन हो तो मैं कह सकता हूं – बधाई हो, अब आप 25% टैरिफ चुका रहे हैं।” ट्रंप ने बताया कि अमेरिका के पास समयसीमा को घटाने या बढ़ाने की पूरी स्वतंत्रता है। वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने एक साक्षात्कार में कहा कि यदि सकारात्मक प्रगति जारी रही तो लेबर डे (सितंबर) तक व्यापार समझौते पूरे हो सकते हैं।

यूरोप और भारत से बातचीत
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में यूरोपीय संघ को नया व्यापार प्रस्ताव भेजा है। वहीं, भारत ने भी उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल को वॉशिंगटन भेजकर व्यापार वार्ताओं को आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने भी कहा कि 8-9 जुलाई की समयसीमा निर्णायक नहीं है और राष्ट्रपति के पास इसमें बदलाव का अधिकार है।

कनाडा के साथ वार्ता रोकी
ट्रंप ने कनाडा की डिजिटल सेवा कर नीति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अमेरिका इस नीति को प्रत्यक्ष हमला मानता है और इसके चलते कनाडा के साथ व्यापार वार्ता को तत्काल निलंबित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगले सात दिनों में कनाडा को सूचित किया जाएगा कि अमेरिका के साथ व्यापार करने पर उसे कितना शुल्क देना होगा। कनाडा का यह कर स्थानीय और विदेशी तकनीकी कंपनियों पर लागू होता है जो ऑनलाइन यूजर्स से जुड़ती हैं।

इस तरह, ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका की व्यापार नीतियां अब पूरी तरह “अमेरिका फर्स्ट” के सिद्धांत पर चलेंगी – चाहे उसे वैश्विक असहमति का सामना ही क्यों न करना पड़े।

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