महाकाल परिसर में फिर बनेगा परमारकालीन शिव मंदिर: 37 फीट रहेगी ऊंचाई; 28 कारीगर कर रहे काम

उज्जैन। महाकालेश्वर मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान मिले करीब एक हजार वर्ष पुराने मंदिर के अवशेषों को अब फिर से भव्य स्वरूप दिया जा रहा है। प्राचीन स्थापत्य शैली में बन रहे इस शिव मंदिर का आधारभूत निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। मंदिर के पुनर्निर्माण का काम वर्ष 2027 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए रोजाना 28 कुशल कारीगर काम कर रहे हैं।
मई 2020 में महाकाल मंदिर विस्तार के दौरान गहरी खुदाई की गई थी। करीब 25 से 30 फीट नीचे खुदाई में प्राचीन मंदिर के अवशेष मिले थे। इनमें शिवलिंग, नंदी, गणेश, मां चामुंडा और शार्दुल की प्रतिमाएं शामिल थीं। पुरातत्व विशेषज्ञों ने इन अवशेषों को परमारकालीन मंदिर का बताया था।
37 फीट ऊंचा होगा मंदिर
महाकाल मंदिर परिसर में शिखर के अग्र भाग के सामने इस प्राचीन शिव मंदिर का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। मंदिर की ऊंचाई करीब 37 फीट होगी। निर्माण पर करीब 65 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। पुरातत्व विशेषज्ञों की निगरानी में चल रहे इस काम को अगले वर्ष पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

पुराने पत्थरों से तैयार हो रहा मंदिर
मंदिर के निर्माण में खुदाई के दौरान मिले प्राचीन पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है। जहां मूल पत्थर उपलब्ध नहीं हैं, वहां राजस्थान से बेसाल्ट पत्थर मंगवाए जा रहे हैं। इन पत्थरों को प्राचीन स्थापत्य शैली के अनुसार तराशकर मंदिर में लगाया जा रहा है।
राजस्थान से बुलाए गए कुशल कारीगर
प्राचीन स्वरूप को बनाए रखने के लिए राजस्थान से विशेष कारीगर बुलाए गए हैं। करीब 28 कुशल कारीगर रोजाना मंदिर के निर्माण में जुटे हैं। विशेषज्ञों की निगरानी में प्रत्येक पत्थर और अवशेष को उसकी मूल संरचना के अनुसार तैयार किया जा रहा है।
अवशेषों की नंबरिंग कर जोड़ा जा रहा
खुदाई में मिले स्तंभ, आमलक, कुंभ भाग सहित अन्य प्राचीन अवशेषों की पहचान कर उनकी क्रमवार नंबरिंग की गई है। अब इन्हीं मूल अवशेषों को आधार से शिखर तक क्रम से जोड़कर मंदिर का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। उद्देश्य मंदिर को उसके प्राचीन स्वरूप के करीब तैयार करना है।