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महाकाल दर्शन के बाद संस्कृत विश्वविद्यालय पहुंचे उत्तराखंड के राज्यपाल; AI लाइब्रेरी के लिए दिए 1.25 लाख; छात्रों को सुनाया ‘पार्वती प्रसंग’

उज्जैन। उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह शनिवार को उज्जैन पहुंचे। प्रवास के दौरान उन्होंने विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की।

मंदिर पहुंचने पर महाकाल मंदिर के सहायक प्रशासक मुकेश सोनी ने उनका स्वागत किया। दर्शन के बाद राज्यपाल ने महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय का भ्रमण किया और वहां की शैक्षणिक गतिविधियों तथा व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

विश्वविद्यालय में राज्यपाल के पहुंचते ही एनसीसी कैडेट्स ने अनुशासन और गरिमा के साथ गार्ड ऑफ ऑनर देकर उनका स्वागत किया। वैदिक मंत्रोच्चार और कलश दर्शन के बीच राज्यपाल का अभिनंदन हुआ।

विद्यार्थियों के लिए नए अवसर विकसित करें 
कार्यक्रम में उन्होंने संस्कृत शिक्षा के विस्तार और विद्यार्थियों के लिए नए अवसर विकसित करने पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत सिर्फ प्राचीन परंपराओं तक सीमित भाषा नहीं है, बल्कि इसमें ज्ञान, विज्ञान और आध्यात्मिक चिंतन की समृद्ध विरासत समाई है। उन्होंने छात्रों से संस्कृत के अध्ययन को रुचि और निरंतर समर्पण के साथ आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

सुविधाओं के लिए 1.25 की सहायता
राज्यपाल ने पुस्तकालय की व्यवस्थाएं देखीं तो उसे आधुनिक तकनीक से जोड़ने की पहल की। उन्होंने AI आधारित सुविधाओं के लिए 1.25 लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की। इसके बाद उन्होंने पुस्तकालय में सुरक्षित रखी दुर्लभ पुरानी पांडुलिपियों को देखा और भारतीय ज्ञान परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने पर जोर दिया। राज्यपाल ने छात्रों को ‘जब जिद पर आ गई पार्वती’ प्रसंग गाकर सुनाया। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत अध्ययन जारी रखने की प्रेरणा दी और कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र को केदारनाथ का स्मृति चिन्ह भेंट किया।

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