कटनी में कीचड़ वाली सड़क से ‘स्कूल चले हम’: छात्राएं बोलीं- नेता आते हैं, वादे करते हैं; फिर भी नहीं बनी सड़क

कटनी। बारिश में 1.5 किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क कीचड़ में तब्दील हो गई है। हालात ऐसे हैं कि बच्चों और छात्राओं को रोज दलदल भरे रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ रहा है। मामले को लेकर प्रदेश प्रकाश टीम ने कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी के ऑफिशियल नंबर पर फोन कर जानकारी ली। इस दौरान कहा गया अभी मीटिंग में हैं।
फिसलन और कीचड़ के कारण कई छात्राएं चोटिल भी हो चुकी हैं। छात्राओं का कहना है कि चुनाव के समय नेता सड़क बनवाने के वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही ये वादे भी गायब हो जाते हैं।
कटनी के विजयराघवगढ़ और बड़वारा विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में आज भी कई जगह पक्की सड़क की सुविधा नहीं पहुंच पाई है। ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को बारिश के मौसम में जान जोखिम में डालकर इसी कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते से आवागमन करना पड़ रहा है।
भारी बारिश के कारण सड़क बनी दलदल
विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम हदरहटा स्थित मथुरा कॉलोनी में भारी बारिश के कारण सड़क दलदल बन चुकी है। इसपर से निकलने वाले दोपहिया वाहन के साथ कभी भी हादसा हो सकता है। हाल ही में सड़क पर फिसलकर चोटिल हुई स्कूली बच्चियों ने एक वीडियो जारी किया था।

कीचड़ होने से आए दिन लगती है चोट
छात्राओं का कहना है- सड़क पर इतना कीचड़ है कि हम आए दिन गिरकर चोटिल हो जाते हैं। कपड़े खराब हो जाते हैं। चोट लगने से पढ़ाई का नुकसान होता है। अगर सड़क जल्द नहीं बनी, तो हमारी शिक्षा पूरी तरह ठप हो जाएगी।

1.5 किलोमीटर की सड़क कच्ची
दूसरा मामला बड़वारा विधानसभा क्षेत्र का है। ग्राम पंचायत बरेली रामपुर के आश्रित गांव पड़रिया में 100 लोग रहते है। यहाँ 1.5 किलोमीटर की सड़क पूरी तरह कच्ची है। इस वजह से गाँव में एंबुलेंस नहीं आ पाती है। लोग गर्भवती महिलाओं और मरीजों को खाट पर लादकर मुख्य मार्ग तक लाते है।

खेत होने की वजह से सड़क बनाने की अनुमति नहीं
ग्राम पंचायत की सरपंच सरोज त्रिपाठी के अनुसार, सड़क के रास्ते में लगभग 40 से 50 किसानों के खेत आ रहे हैं। जिनमें से 5 किसानों की निजी जमीन के कारण भू-स्वामी अपनी सहमति नहीं दे रहे हैं। इसी पेंच की वजह से निर्माण कार्य अटका हुआ है।
SDM बोली- जल्द करेंगे समाधान
निधि गोहल (SDM) ने कहा कि पड़रिया गांव की समस्या और स्कूली बच्चों की कठिनाइयों का मामला संज्ञान में आया है। निजी भूमि के स्वामित्व और सहमति के मुद्दे पर जल्द ही संबंधित पक्षों से वार्ता की जाएगी। हमारी प्राथमिकता है कि कोई वैकल्पिक या स्थायी व्यवस्था जल्द से जल्द बनाई जाए। जिससे बच्चों की शिक्षा और ग्रामीणों का आवागमन सुचारू हो सके।