कटनी के कैमोर में CSR के तालाबों में नहीं भरा पानी: 4-5 करोड़ खर्च के बाद भी सूखे; अब तकनीकी जांच की मांग

कटनी। ACC अदानी सीमेंट की ओर से CSR फंड से कराए गए जल संरक्षण कार्यों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मानसून में अच्छी बारिश होने के बावजूद क्षेत्र में बनाए और गहरीकरण किए गए कुछ तालाबों में पर्याप्त पानी जमा नहीं होने का मामला सामने आया है। इसे लेकर स्थानीय स्तर पर निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी मूल्यांकन और जल संरक्षण कार्यों की उपयोगिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
बारिश के बाद भी नहीं दिखा अपेक्षित जलभराव
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मानसून के दौरान पर्याप्त बारिश होने के बाद भी कुछ तालाबों में पानी नहीं ठहर रहा है। ऐसे में जल संरक्षण के लिए बनाए गए इन ढांचों की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बारिश का पानी ही तालाबों में जमा नहीं होगा तो गर्मी के दिनों में इसका लाभ कैसे मिल पाएगा।

तकनीकी सर्वे और मिट्टी की जांच पर सवाल
जल संरक्षण विशेषज्ञों के अनुसार तालाब निर्माण या गहरीकरण से पहले मिट्टी की जल-धारण क्षमता और पारगम्यता का तकनीकी अध्ययन महत्वपूर्ण होता है। आरोप है कि संबंधित कार्यों में इन पहलुओं का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। हालांकि, इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए तकनीकी परीक्षण और मौके का निरीक्षण जरूरी है।

करोड़ों के CSR खर्च के बाद परिणाम पर उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि जल संरक्षण से जुड़े कार्यों पर करीब 4 से 5 करोड़ रुपए CSR फंड से खर्च किए गए हैं। इसके बावजूद तालाबों में पानी नहीं रुकने से खर्च की गई राशि के जमीनी परिणाम को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि कार्यों की लागत, स्वीकृति, निर्माण एजेंसी और उपयोगिता की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
गर्मी में जल संकट की चिंता
मानसून के दौरान पर्याप्त जलभराव नहीं होने से ग्रामीणों को आने वाली गर्मी में जल संकट की चिंता सता रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जल संरक्षण के नाम पर किए गए कार्य तभी सफल माने जाएंगे, जब उनका लाभ लंबे समय तक क्षेत्र को मिले। इसके लिए तालाबों की वास्तविक क्षमता और पानी रोकने की स्थिति का परीक्षण जरूरी है।

स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराने की मांग
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल संरक्षण कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराने की मांग की है। इसके तहत तालाबों का भौतिक निरीक्षण, मिट्टी की जांच, निर्माण की गुणवत्ता, स्वीकृत राशि और खर्च का मिलान कराया जाए। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की गई है।