सीधी के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में नर्सिंग कॉलेज: संचालक बोले- सांसद का बेटा हूं तो सुसाइड कर लूं; क्या मैं बिजनेस नहीं कर सकता

सीधी। जिले के भदौरा स्थित आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज की मान्यता को लेकर NSUI ने सवाल उठाए हैं। NSUI का आरोप है कि 24 जुलाई को निरीक्षण के दौरान कॉलेज का भवन तैयार नहीं। इसके बाद भी संस्थान को B.Sc. नर्सिंग की 60 और GNM की 60 यानी कुल 120 सीटों की मान्यता मिल गई है।
कॉलेज का संचालन और प्रबंधन भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के बेटे अनूप मिश्रा और बहू बीना मिश्रा के साथ अन्य लोग कर रहे हैं। संगठन ने निरीक्षण और मान्यता प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
अभी कॉलेज में एक भी स्टूडेंट नहीं
कॉलेज में अभी एक भी स्टूडेंट नहीं है। नर्सिंग की फैकल्टी की प्रक्रिया ऑनलाइन है। अगर उनका रजिस्ट्रेशन कही और है तो कंप्यूटर फॉर्म रिजेक्ट कर देता है। जब पूरी प्रक्रिया ही ऑनलाइन है तो कैसे गड़बड़ी हो सकती है। किसी भी फैकल्टी का अपॉइंटमेंट अभी नहीं हुआ है। एक फैकेल्टी एक ही जगह पर काम कर सकता है। अनुभव की बात की जाए तो फॉर्म में सभी का अनुभव लिखा जाता है। उसके बाद ही चयन होता है।

अब पढ़ें डॉ. अनूप मिश्रा से किए गए सवाल और उनके जबाव…
सवाल: NSUI का आरोप है कि शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में नर्सिंग कॉलेज चल रहा है?
जवाब: किराए की बिल्डिंग में संचालन करने का प्रावधान है।
सवाल: NSUI ने फेकेल्टी के प्रमाण पत्र की जांच करने की मांग की है?
जवाब: फैकल्टी की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। कोई गड़बड़ी नही हो सकती।
सवाल: वर्तमान में कितने बच्चे कॉलेज में पढ़ रहे है?
जवाब: अभी कॉलेज शुरू नहीं हुआ है। कक्षाएं नहीं चल रही है।
सवाल: फेकेल्टी के अनुभव को लेकर भी सवाल किए जा रहे है?
जवाब: फॉर्म भरते समय ही अनुभव भी मांगा जाता है। बिना अनुभव के फॉम नहीं भर सकते।
120 सीटों की मान्यता मिली
NSUI ने सीबीआई को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि इस आधे-अधूरे कॉलेज को 120 सीटों की मान्यता मिली है। भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के बेटे अनुप मिश्रा और बहू बीना मिश्रा ने निर्माणाधीन बिल्डिंग में नर्सिंग कॉलेज खोला है।

CBI जांच की मांग
NSUI ने CBI से की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। NSUI ने आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए CBI भोपाल के संयुक्त निदेशक, मुख्यमंत्री और विभाग के तमाम अधिकारियों को लिखित शिकायत दी है।

सीधी चैलेंज कप टूर्नामेंट स्पोर्ट समिति से हो रहा संचालन
NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि कॉलेज के दस्तावेजों और मौके की स्थिति के आधार पर कॉलेज की मान्यता प्रक्रिया की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया है कि कॉलेज संचालन अनुप मिश्रा , बीना मिश्रा, वैष्णवी मिश्रा, शरद पाठक, राजेश सिंह चौहान रामजियावन पटेल और रीवा के संजय द्विवेदी ने सीधी चैलेंज कप टूर्नामेंट स्पोर्ट समिति सीधी के माध्यम से किया जा रहा हैं।

कॉलेज की ओनर्शिप की जांच हो
रवि परमार ने बताया कि NSUI ने CBI से मांग की है कि कॉलेज की ओनर्शिप, संचालन, प्रबंधन, आर्थिक लेन-देन, मान्यता के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों तथा संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाए।

निर्माणाधीन भवन में 120 सीटों की मान्यता कैसे?
NSUI की शिकायत के अनुसार कॉलेज ने B.Sc. Nursing की 60 और GNM Nursing की 60, कुल 120 सीटों के लिए मान्यता का आवेदन किया था। परमार का कहना है कि जिस समय कॉलेज की मान्यता की प्रक्रिया हुई, उस समय कॉलेज बन रहा था और अभी भी बन ही रहा हैं। इसके बावजूद निरीक्षण दल ने कॉलेज को मान्यता दे दी।
फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्रों को भी फर्जी कहा
रवि परमार ने सवाल उठाया कि अगर निरीक्षण के समय बिल्डिंग, लैब और अन्य संसाधन निर्धारित मानकों के अनुरूप उपलब्ध नहीं थे, तो निरीक्षण दल ने किस आधार पर कॉलेज को मान्यता के योग्य पाया? रवि ने कॉलेज द्वारा प्रस्तुत किए गए फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्रों को भी फर्जी बताया हैं।

जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच
उपाध्यक्ष ने CBI से मांग की गई है कि हर प्रमाण-पत्र को संबंधित अस्पताल, संस्था या नियोक्ता से सीधे सत्यापित कराया जाए। अगर कोई प्रमाण-पत्र फर्जी पाया जाता है तो उसके आधार पर मान्यता प्राप्त करने में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाए।
कॉलेज में उपलब्ध सुविधाओं की जांच की जाएं
NSUI ने कहा कि जांच केवल कॉलेज संचालकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के रजिस्ट्रार और संबंधित अधिकारियों, निरीक्षण दल के सदस्यों और मान्यता प्रक्रिया में शामिल प्रत्येक अधिकारी की भूमिका की भी जांच की जाएं है। इसके साथ ही निरीक्षण के दौरान कॉलेज में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध थीं और निरीक्षण रिपोर्ट में इसके लिए क्या लिखा गया यह भी जांच हो।

छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप
NSUI जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि यदि किसी ऐसे कॉले में स्टूडेंट्स को एडमिशन दिया जाता है तो इसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ेगा।
लाखों खर्च करके पढ़ते हैं नर्सिंग
अक्षय तोमर ने कहा कि विद्यार्थी लाखों खर्च करके नर्सिंग पढ़ते हैं। ऐसे में यदि बाद में कॉलेज की मान्यता, परीक्षा, डिग्री या पंजीयन को लेकर विवाद उत्पन्न होता है तो विद्यार्थियों के भविष्य को खतरा होगा।

विद्यार्थियों के भविष्य के साथ समझौता नहीं होगा
NSUI ने कहा कि नर्सिंग शिक्षा के नाम पर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन ने CBI से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।