कश्मीर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई शब-ए-बारात, मस्जिदों व दरगाहों में हुई विशेष नमाज़

कश्मीर घाटी में मंगलवार रात शब-ए-बारात पारंपरिक श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के साथ मनाई गई। घाटी भर की मस्जिदों और दरगाहों में इस्लाम धर्म के अनुयायियों ने देर रात तक विशेष नमाज़ अदा की और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी की दुआ मांगी।

राजधानी श्रीनगर सहित घाटी के विभिन्न इलाकों में बड़ी संख्या में लोग मस्जिदों और दरगाहों में एकत्रित हुए। शब-ए-बारात को ‘क्षमा की रात’ माना जाता है, जिसमें ईश्वर से रहमत और मग़फिरत की प्रार्थना की जाती है। इस अवसर पर कुरान की तिलावत, नफ़्ल नमाज़ और विशेष दुआओं का आयोजन किया गया।

श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की कब्रों पर जाकर मोमबत्तियाँ जलाईं और उनके लिए दुआएं कीं। कब्रिस्तानों में देर रात तक रौनक बनी रही। कई परिवारों ने घरों में भी इबादत कर अल्लाह से शांति, बरकत और खुशहाली की कामना की।

अधिकारियों के अनुसार, कश्मीर में शब-ए-बारात आमतौर पर रमज़ान के पवित्र महीने से करीब दो सप्ताह पहले मनाई जाती है। इस दौरान घाटी में शांति और सौहार्द का माहौल देखने को मिला। धार्मिक नेताओं ने भी लोगों से आपसी भाईचारे, सद्भाव और नेक अमल की राह पर चलने का संदेश दिया।

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