जेटीसी की नौवीं बैठक में भारत-म्यांमार ने कनेक्टिविटी सुधार और व्यापार विस्तार समेत कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया

भारत-म्यांमार संयुक्त व्यापार समिति (जेटीसी) की नौवीं बैठक म्यांमार के नाय प्यी ताव में आयोजित की गई। बैठक की सह-अध्यक्षता म्यांमार के वाणिज्य मंत्रालय के उप मंत्री यू मिन मिन और भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अपर सचिव नितिन कुमार यादव ने की। बैठक में दोनों पक्षों के संबंधित मंत्रालयों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
बैठक में कनेक्टिविटी सुधार, बाजार पहुंच का विस्तार, वित्तीय लेनदेन को सुगम बनाना, सीमा संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर उन्नयन, सीमा व्यापार चौकियों को पुनः खोलना, रुपया-क्यात व्यापार निपटान प्रणाली को बढ़ावा देना और आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (एआईटीआईजीए) के लाभों को अधिकतम करने जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
म्यांमार पक्ष ने भारत सरकार द्वारा उनके निर्यात, विशेष रूप से दालों और फलियों के क्षेत्र में खुले और सहायक नीतिगत वातावरण बनाए रखने के लिए आभार व्यक्त किया।
दोनों पक्षों ने आपसी विकास को गति देने के लिए वस्त्र, परिवहन और कनेक्टिविटी, क्षमता निर्माण, सीमा शुल्क, जहाजरानी, बिजली, आईसीटी, एमएसएमई, स्वास्थ्य, औषधि और कृषि क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। इसके माध्यम से दीर्घकालिक लाभ और मजबूत सहयोग सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया।
सीमा पार व्यापार को सुगम बनाने के लिए तामू-मोरेह और रही-जोखावथर सीमा व्यापार चौकियों के महत्व की पुष्टि की गई। भारतीय पक्ष ने इन स्थलीय चौकियों को शीघ्र फिर से खोलने का अनुरोध दोहराया। व्यापार दक्षता बढ़ाने के लिए तामू में एक एकीकृत चेक पोस्ट विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 के दौरान 2.15 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। विस्तार की संभावनाओं को देखते हुए, 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के साझा लक्ष्य पर सहमति बनी।
इसके अलावा, दोनों पक्षों ने एआईटीआईजीए की समीक्षा को शीघ्र पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई, ताकि इसे सरल, संतुलित और व्यापार को सुगम बनाने वाला बनाया जा सके। जेटीसी की अगली बैठक नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी।






