झीरम घाटी नक्सली हमला: NIA कोर्ट का फैसला, 10 दोषियों को फांसी की सजा; 13 साल बाद आया निर्णय

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले में NIA की विशेष अदालत ने 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला हमले के करीब 13 साल बाद आया है। 5 सितंबर को कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को दोषी माना था। अब दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने सजा सुनाई है। जज अजय सिंह राजपूत ने यह फैसला दिया।

साल 2013 में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले परिवर्तन यात्रा निकाली थी। इसी दौरान कांग्रेस का काफिला झीरम घाटी पहुंचा था। यहां घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने काफिले पर हमला कर दिया था। हमले में 27 लोगों की मौत हुई थी और 15 लोग घायल हुए थे।

कोर्ट ने प्रमिला मोडियम, चैतू लेखन उर्फ मुन्ना, सुमित्रा मोडियम, मुक्का मांडवी, कोसा कवासी, आयाता मरकाम, मढ़कामी देवा, जोगा मदकामी, बनजामी सन्ना और महादेव नाग को दोषी माना है।

कई बड़े नेताओं की हुई थी मौत
हमले में तत्कालीन छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की मौत हुई थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और कांग्रेस नेता उदय मुदलियार भी मारे गए थे। सलवा जुडूम से जुड़े नेता महेंद्र कर्मा की भी हमले में मौत हुई थी।

नेताओं ने जांच पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने NIA की जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बड़े नक्सली नेताओं से पूछताछ नहीं हुई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सिर्फ 10 लोगों को सजा मिलने से पूरे मामले में न्याय नहीं हुआ है।

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