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झाबुआ में तेजा दशमी पर निकली भव्य निशान यात्रा: बैंड-बाजे के साथ उमड़े श्रद्धालु; मन्नतधारियों ने चढ़ाए निशान

झाबुआ। भादवा माह की बड़ी तेजा दशमी का पर्व सोमवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। जिले के झाबुआ, पेटलावद, थांदला, रानापुर और मेघनगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में वीर तेजाजी महाराज के मंदिरों तक भव्य निशान यात्रा निकाली गई। बैंड-बाजे के साथ निकले चल समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मन्नतधारियों ने मंदिरों में निशान चढ़ाकर अपनी मन्नत पूरी की।

रायपुरिया में प्रमुख मार्गों से निकली निशान यात्रा
रायपुरिया कस्बे में निशान यात्रा का शुभारंभ सिवी मोहल्ले से हुआ। बैंड-बाजे के साथ निकली यात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से होते हुए झाबुआ चौराहे पर पहुंची। इसके बाद यात्रा वीर तेजाजी महाराज मंदिर परिसर में संपन्न हुई। मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अपने निशान अर्पित किए।

ताती खोलने की निभाई गई परंपरा
स्थानीय मान्यता के अनुसार जहरीले जीव-जंतुओं के काटने पर पीड़ित व्यक्ति के परिजन वीर तेजाजी महाराज के नाम की ‘ताती’ यानी धागा बांधते हैं। इसे भादवा माह की बड़ी तेजा दशमी के दिन खोलने की परंपरा है। इसी परंपरा के तहत बड़ी संख्या में श्रद्धालु तेजाजी महाराज के मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की।

रायपुरिया का तेजाजी मंदिर करीब 65 साल पुराना
रायपुरिया बस स्टैंड पर स्थित वीर तेजाजी महाराज का मंदिर करीब 65 वर्ष पुराना बताया जाता है। क्षेत्र के लोगों की इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था है। स्थानीय लोगों का मानना है कि सच्चे मन से मन्नत मांगने पर यहां मनोकामना पूरी होती है।

मोरपंख से झाड़ा लगाने की मान्यता
मंदिर के पुजारी बालूराम पाटीदार ने बताया कि जहरीले जीव-जंतुओं के काटने से पीड़ित लोग दूर-दूर से यहां आते हैं। उनके अनुसार, पीड़ित को तेजाजी महाराज की प्रतिमा के सामने बैठाकर धागा बांधा जाता है और मोरपंख से झाड़ा लगाया जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि महाराज की कृपा से पीड़ित को एक-दो दिन में आराम मिल जाता है। यह स्थानीय धार्मिक आस्था और परंपरा का हिस्सा है।

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