भारत में लाइकेन पतंगों की दो नई प्रजातियों की खोज, हिमालय क्षेत्र से 7 प्रजातियां पहली बार दर्ज

भारत में कीट विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल हुई है। Zoological Survey of India (भारतीय प्राणी सर्वेक्षण) के वैज्ञानिकों ने लेपिडोप्टेरा वर्ग की लाइकेन पतंगों की दो नई प्रजातियों की खोज की है। इसके साथ ही भारतीय हिमालय क्षेत्र से सात अन्य प्रजातियों का पहली बार दस्तावेजीकरण भी किया गया है, जो देश की जैव विविधता के अध्ययन में अहम योगदान माना जा रहा है।
संस्थान द्वारा जारी बयान के अनुसार इस शोध का प्रकाशन 2 मार्च को एक अंतरराष्ट्रीय वर्गिकी शोध पत्रिका में किया गया है। अध्ययन में भारतीय वैज्ञानिकों की टीम ने नई प्रजातियों का विस्तृत वैज्ञानिक विवरण प्रस्तुत किया है और उनके संरचनात्मक तथा जैविक गुणों का विश्लेषण किया है।
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण की निदेशक Dhriti Banerjee ने इस उपलब्धि को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह खोज भारत में पतंगों की जैव विविधता के दस्तावेजीकरण में बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया कि लेपिडोप्टेरा जैसे कम अध्ययन किए गए जीव समूहों पर शोध पारिस्थितिकी तंत्र की कार्यप्रणाली को समझने और हिमालयी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के संकेतक जीवों की पहचान के लिए बेहद आवश्यक है।
इस शोध दल में कोलकाता स्थित भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के वैज्ञानिक Navneet Singh, जबलपुर स्थित केंद्रीय क्षेत्रीय केंद्र के वैज्ञानिक Santosh Singh तथा शोधार्थी Srishti Bhattacharya शामिल थे। इन प्रजातियों की पहचान सिक्किम के गोलितार और पश्चिम बंगाल के पानीझोरा क्षेत्र से एकत्र किए गए नमूनों के अध्ययन के आधार पर की गई।
वैज्ञानिकों के अनुसार इन पतंगों की पहचान उनके शरीर की बनावट, पंखों के रंग और पैटर्न, सूक्ष्म शारीरिक संरचनाओं तथा प्रजनन अंगों की विशेष संरचना के आधार पर की गई है। लाइकेन पतंगों का पारिस्थितिकी तंत्र में विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि इनके शिशु लाइकेन पर निर्भर रहते हैं, जो वायु प्रदूषण के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं। इस कारण ये प्रजातियां पर्यावरण और वायु गुणवत्ता के प्राकृतिक संकेतक के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।






