पश्चिम एशिया संघर्ष का असर: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही ठप, पोत परिवहन 80% घटा

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दूसरे सप्ताह में पहुंचते ही इसका असर अब वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।

रिपोर्ट के अनुसार इस मार्ग पर पोत परिवहन में 80 प्रतिशत से अधिक गिरावट दर्ज की गई है। लगभग 150 तेल टैंकर जलडमरूमध्य के बाहर खुले समुद्र में लंगर डाले खड़े हैं, जिनमें करीब 16 अरब लीटर तेल भरा हुआ है।

जहाजों पर हमलों की खबरें

सूत्रों के अनुसार जलडमरूमध्य के आसपास कम से कम 10 वाणिज्यिक जहाजों पर गोले या ड्रोन से हमले होने की खबरें सामने आई हैं। इसके अलावा फारस की खाड़ी में व्यापक GPS जैमिंग के कारण जहाजों के लिए नेविगेशन और सुरक्षा का खतरा और बढ़ गया है।

फ्रांस ने शुरू की यूरोपीय नौसैनिक पहल

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए यूरोपीय नौसैनिक गठबंधन बनाने की घोषणा की है।

इस मिशन को यूरोपीय नेतृत्व वाले समुद्री सुरक्षा मिशन “एजेनोर” का आपातकालीन विस्तार बताया गया है।

चार्ल्स डी गॉल विमानवाहक पोत तैनात

फ्रांस ने इस अभियान के तहत अपना प्रमुख विमानवाहक पोत “चार्ल्स डी गॉल” तैनात किया है। इसके साथ आठ फ्रिगेट और दो हेलीकॉप्टर भी इस समुद्री सुरक्षा अभियान में शामिल हैं।

ग्रीस, साइप्रस और नीदरलैंड ने भी इस गठबंधन में भाग लेने की पुष्टि की है।

अमेरिकी अभियान से अलग पहल

यूरोपीय देशों ने इस पहल को अमेरिका के सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ से अलग रखा है। चूंकि अमेरिका इस संघर्ष में एक प्रमुख पक्ष है, इसलिए कई यूरोपीय और खाड़ी देशों ने सीधे अमेरिकी कार्रवाई में शामिल होने से बचने के लिए फ्रांस के नेतृत्व वाली पहल का समर्थन किया है।

वैश्विक तेल बाजार पर दबाव

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इसके बाधित होने से वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ता जा रहा है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए अनुरक्षण अभियान और राजनीतिक जोखिम बीमा की पेशकश भी की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबे समय तक जारी रहा, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

Share

Similar Posts