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संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने किया गोपाल मंदिर और लाल बाग पैलेस का निरीक्षण, ऑडिटोरियम निर्माण एक माह में पूर्ण करने के निर्देश

इंदौर, 29 अक्टूबर 2025 —
संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने बुधवार को राजवाड़ा स्थित गोपाल मंदिर और लाल बाग पैलेस का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने दोनों ऐतिहासिक स्थलों पर चल रहे विकास एवं रिनोवेशन कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। 

निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त ने गोपाल मंदिर परिसर में निर्माणाधीन ऑडिटोरियम हॉल का जायजा लिया और कहा कि “ऑडिटोरियम का कार्य एक माह में पूर्ण किया जाए ताकि आगामी योजना पर तुरंत कार्य प्रारंभ किया जा सके।” उन्होंने स्मार्ट सिटी सीईओ श्री अर्थ जैन, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती कल्याणी पाण्डे और अन्य अधिकारियों को समयसीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।

डॉ. खाड़े ने मंदिर परिसर में बुनियादी सुविधाओं, पार्किंग व्यवस्था और कैफेटेरिया के निर्माण पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि गोपाल मंदिर के ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को ध्यान में रखते हुए एक गैलरी (heritage gallery) भी स्थापित की जाए ताकि पर्यटकों को मंदिर के गौरवशाली इतिहास की जानकारी मिल सके।

 

निरीक्षण के दौरान उन्होंने मंदिर के पीछे बने मार्केट क्षेत्र का भी अवलोकन किया और दुकानदारों से चर्चा की। इससे पूर्व डॉ. खाड़े ने गोपाल मंदिर के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

बाद में संभागायुक्त लाल बाग पैलेस पहुंचे और वहां चल रहे रिनोवेशन कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने दरबार हॉल, बैकेट हॉल, डॉसिंग रूम, क्राउन हॉल, सिटिंग हॉल और लाइब्रेरी का विस्तृत अवलोकन किया।

असिस्टेंट क्यूरेटर श्री आशुतोष महाशब्दे ने जानकारी दी कि लाल बाग पैलेस प्रतिदिन बड़ी संख्या में आगंतुकों को आकर्षित करता है। नागरिक नाममात्र शुल्क पर सुबह 10 बजे से शाम तक पैलेस का भ्रमण कर सकते हैं।

इतिहासकारों के अनुसार, लाल बाग पैलेस का निर्माण तुकोजीराव द्वितीय द्वारा करवाया गया था, जिसे पूर्ण होने में लगभग 65 वर्ष का समय लगा। यह पैलेस 55 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला है और इसके परिसर में पहले लाल रंग के गुलाबों की कई दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती थीं, जिनके कारण इसका नाम “लाल बाग” पड़ा।

संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने कहा कि “गोपाल मंदिर और लाल बाग पैलेस दोनों ही इंदौर की सांस्कृतिक धरोहर हैं। इन स्थलों को पुनर्जीवित कर हम शहर के पर्यटन और सांस्कृतिक गौरव को नई पहचान देंगे।”

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