ग्लोबल बाजारों में कमजोरी का माहौल, अमेरिकी गिरावट के बाद एशियाई बाजारों में बिकवाली हावी

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में दबाव का माहौल देखने को मिल रहा है। अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान भारी बिकवाली हुई, जिसका असर सोमवार को एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। अधिकांश एशियाई सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।

अमेरिकी बाजारों में बड़ी गिरावट

अमेरिकी शेयर बाजार पिछले सत्र में भारी गिरावट के साथ बंद हुए। टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली के कारण प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बना रहा।

डाउ जॉन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 695.15 अंक यानी 1.35 प्रतिशत गिरकर 50,866.78 अंक पर बंद हुआ।
वहीं एसएंडपी 500 200.57 अंक यानी 2.64 प्रतिशत टूटकर 7,383.74 अंक पर पहुंच गया।
टेक शेयरों पर दबाव के कारण नैस्डेक में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 1,121.53 अंक यानी 4.18 प्रतिशत लुढ़ककर 25,709.43 अंक पर बंद हुआ।

आज शुरुआती कारोबार में डाउ जॉन्स फ्यूचर्स भी कमजोरी के साथ कारोबार करता दिखाई दिया, जिससे निवेशकों की सतर्कता बनी हुई है।

यूरोपीय बाजारों का मिला-जुला प्रदर्शन

यूरोपीय शेयर बाजारों में भी दबाव देखने को मिला, हालांकि अंतिम घंटों में हुई खरीदारी के चलते कुछ बाजार संभल गए।

एफटीएसई 100 इंडेक्स मामूली 0.07 प्रतिशत की बढ़त के साथ 10,368.05 अंक पर बंद हुआ।
दूसरी ओर सीएसी 40 इंडेक्स 0.32 प्रतिशत फिसलकर 8,218.24 अंक पर बंद हुआ।
जर्मनी का डीएएक्स इंडेक्स 185.90 अंक यानी 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,759.05 अंक पर बंद हुआ।

एशियाई बाजारों में बिकवाली का दबाव

अमेरिकी बाजारों में आई कमजोरी का असर एशियाई बाजारों पर भी साफ दिखाई दिया। एशिया के अधिकांश प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं।

कोस्पी इंडेक्स में सबसे अधिक कमजोरी देखी गई और यह 4.55 प्रतिशत तक टूट गया।
निक्केई 225 भी 3.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया।
ताइवान वेटेड इंडेक्स में 3.22 प्रतिशत और जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स में 2.55 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।

इसके अलावा स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स और हैंग सेंग इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।

हालांकि, गिफ्ट निफ्टी और शंघाई कंपोजिट इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली। गिफ्ट निफ्टी 0.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था, जबकि शंघाई कंपोजिट इंडेक्स में भी तेजी दर्ज की गई।

निवेशकों की नजर तेल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर

विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं। यदि तनाव और बढ़ता है तो निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर तेल की कीमतों, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर बनी रहेगी।

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