EXCLUSIVE- इंदौर में फर्जी ट्रांजिट पर्मिट बनाकर ला रहे लकड़ियां: जलाराम इंटरप्राइजेज पर कार्रवाई; कटर मशीनें सील

इंदौर। टिम्बर मार्केट में लकड़ी के दस्तावेजों की जांच के लिए भोपाल से वन विभाग की टीम आई। टीम ने जलाराम इंटरप्राइजेज पर कार्रवाई की। यहां लगी कटर मशीनों को सील कर दिया गया।
कार्रवाई को लकड़ी के परिवहन में ट्रांजिट पर्मिट के दुरुपयोग से जोड़कर देखा जा रहा है। वन विभाग लंबे समय से इसकी शिकायतें मिल रही थीं।
कुछ महंगी लकड़ियों को बिना वैध टीपी के इंदौर लाया जा रहा है। इसके लिए दूसरे राज्यों के दस्तावेजों का इस्तेमाल किए जा रहे है। कुछ प्रजातियों की लकड़ी के परिवहन के लिए टीपी की जरूरत नहीं होती।
लकड़ी के आने-जाने से जुड़े कुछ सुराग मिले थे
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक भोपाल अमित दुबे ने बताया कि शिकायतों की जांच के दौरान इंदौर में लकड़ी के आने-जाने से जुड़े कुछ सुराग मिले थे। इन्हीं सुरागों के आधार पर टीम ने इंदौर पहुंचकर संबंधित स्थान पर कार्रवाई की। उन्होंने बताया कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग प्रजातियों की लकड़ी के परिवहन को लेकर नियम हैं।
कुछ प्रजातियां टीपी मुक्त
कुछ राज्यों में कुछ प्रजातियां टीपी मुक्त हैं। शिकायत यह थी कि उन्हीं राज्यों के नाम पर कागजात तैयार कर लकड़ी को वहां से आया हुआ बताया जा रहा है। वह लकड़ी वास्तव में स्थानीय स्तर की हो सकती है।
क्या है ट्रांजिट परमिट
ट्रांजिट परमिट एक सरकारी डॉक्यूमेंट है। इसे वाहन और परिवहन के क्षेत्र में अस्थायी परमिट (Temporary Permit) या पारगमन पास भी कहते हैं। इसकी मदद से बिना स्थायी पंजीकरण या दूसरे राज्य के टैक्स चुकाए सीमित समय के लिए गाड़ी चलाई जा सकती है। वन विभाग में लकड़ी व बांस जैसे उत्पादों के परिवहन के लिए राष्ट्रीय ट्रांजिट पास प्रणाली (NTPS) के जरिए ऑनलाइन परमिट लिया जाता है।
पर्मिशन लेना जरूरी
ट्रांजिट परमिट से छूट का मतलब यह नहीं है कि पेड़ों की कटाई बिना अनुमति की जा सके। इन प्रजातियों के पेड़ काटने के लिए संबंधित राजस्व विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। वन विभाग को यह जिम्मेदारी दी गई है कि इस छूट का दुरुपयोग न हो।
इन पेड़ों के लिए जरूरी नहीं टीपी
मोहन सरकार ने जनवरी 2026 में पाँच पेड़ों के लिए टीपी की अनिवार्यता खत्म कर दी थी। इसमें नीलगिरी, कैसुरिना, पोपलर, सुबबूल, विलायती बबूल शामिल है।