धार के सतीपुरा-गढ़ के बीच 200 मीटर पुल से बदली तस्वीर: बारिश में कट जाता था संपर्क; अब 2-3 KM में पूरा होगा सफर

धार। जिले के तिरला विकासखंड में सतीपुरा और गढ़ गांव के बीच मान नदी पर करीब 6 करोड़ रुपए की लागत से 200 मीटर लंबा पक्का पुल बनकर तैयार हो गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बने इस पुल से क्षेत्र के 15 हजार से ज्यादा आदिवासी ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। बरसात में उफनती नदी को नाव और डोंगी के सहारे पार करने की वर्षों पुरानी मजबूरी अब खत्म हो गई है।
पुल बनने से सतीपुरा और गढ़ के बीच आने-जाने का रास्ता भी काफी छोटा हो गया है। पहले ग्रामीणों को करीब 15 से 20 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता था, जो अब घटकर सिर्फ 2 से 3 किलोमीटर रह गया है। इससे ग्रामीणों के समय के साथ पेट्रोल-डीजल और परिवहन खर्च में भी बचत होगी।
बारिश में बंद हो जाता था रास्ता, नाव से जाना पड़ता था
मानसून के दौरान मान नदी का जलस्तर बढ़ने पर दोनों गांवों के बीच सीधा संपर्क लगभग बंद हो जाता था। ग्रामीणों को मोटरसाइकिल और जरूरी सामान तक नाव या डोंगी में रखकर नदी पार करनी पड़ती थी।
सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों और मरीजों को होती थी। बच्चों को स्कूल-कॉलेज जाने के लिए जोखिम उठाना पड़ता था। वहीं किसी ग्रामीण की तबीयत बिगड़ने या आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचना भी चुनौती बन जाता था।
अब पुल बनने के बाद सालभर आवागमन सुगम रहने की उम्मीद है। एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं की पहुंच भी गांवों तक आसान होगी।

परियोजना एक नजर में
- योजना: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना
- पुल की लंबाई: करीब 200 मीटर
- निर्माण लागत: करीब 6 करोड़ रुपए
- लाभार्थी आबादी: 15 हजार से अधिक
- क्षेत्र: मुख्यतः आदिवासी बहुल
- पहले की दूरी: 15 से 20 किलोमीटर
- अब दूरी: करीब 2 से 3 किलोमीटर
किसानों को मंडी तक उपज पहुंचाने में मिलेगी राहत
पुल का फायदा क्षेत्र के किसानों को भी मिलेगा। अब किसान अपनी कृषि उपज और अन्य उत्पादों को नजदीकी मंडियों और बाजारों तक कम दूरी में पहुंचा सकेंगे। दूरी कम होने से समय और परिवहन लागत दोनों की बचत होगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के रास्ते होंगे आसान
सतीपुरा और गढ़ सहित आसपास के गांवों का कस्बों और शहरों से संपर्क बेहतर होने से युवाओं को भी फायदा मिलेगा। उन्हें शिक्षा, रोजगार और अन्य जरूरी सुविधाओं तक पहुंचने में कम समय लगेगा। ग्रामीणों के लिए पुल सिर्फ नदी पार करने का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्र को मुख्य मार्गों और बाजारों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग बन गया है।
‘दशकों पुरानी परेशानी से मिली मुक्ति’
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के महाप्रबंधक शौर्य प्रताप सिंह ने बताया कि पुल से 15 हजार से अधिक आदिवासी आबादी को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के लिए यह पुल सिर्फ नदी पर बना निर्माण नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही परेशानी से मुक्ति का रास्ता है। निर्माण कार्य में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा गया है।