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धार में मकान टूटने पर बवाल: दो लोगों ने जहर पिया; परिवार बोला- पट्टा होने के बावजूद 24 घंटे में तोड़े घर

धार। धामनोद क्षेत्र के ग्राम बेगंदा में अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के बाद विवाद खड़ा हो गया। नर्मदा परिक्रमा आश्रम के पास कार्रवाई में तीन मकान तोड़े जाने के बाद प्रभावित परिवारों के दो सदस्यों ने जहरीला पदार्थ पी लिया। दोनों को धामनोद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर किया गया है। परिवारों का दावा है कि उनके पास जमीन के वैध पट्टे हैं और उन्हें मकान खाली करने के लिए महज 24 घंटे का नोटिस दिया गया था।

शाम को नोटिस, अगले दिन पहुंचा अमला
ग्राम पंचायत बेगंदा की ओर से 20 सितंबर की शाम करीब 4 बजे कैलाश, विष्णु, गणेश, उमेश, गोपाल और सीताबाई को मकान खाली करने का नोटिस दिया गया था। अगले दिन सोमवार सुबह करीब 11 बजे पुलिस और प्रशासन का अमला जेसीबी लेकर मौके पर पहुंचा। कार्रवाई के दौरान धरमपुरी तहसीलदार अंजलि गुप्ता, एसडीओपी मोनिका सिंह, धामनोद थाना प्रभारी संतोष यादव सहित राजस्व, पुलिस और पंचायत के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान तीन मकानों को ढहा दिया। परिवारों का कहना है कि इससे वे बारिश के मौसम में खुले में रहने को मजबूर हो गए हैं।

परिवारों का दावा- हमारे पास वैध पट्टे
पीड़ित परिवारों का दावा है कि जिस जमीन पर उनके मकान बने थे, उसके 4 से 5 साल पुराने भूमिस्वामी पट्टे उनके पास मौजूद हैं। उनका कहना है कि ये पट्टे ग्राम पंचायत की ओर से जारी किए गए थे। दस्तावेजों के अनुसार, उमेश और विष्णु को 60-60 वर्ग मीटर के भूखंड के पट्टे मिले हैं। पीड़ित विष्णु तंवर ने कहा कि पट्टा होने के बावजूद उन्हें पर्याप्त समय दिए बिना मकान तोड़ दिए गए। परिवारों का यह भी दावा है कि जिस जमीन को अतिक्रमण बताया जा रहा है, वहां वे लंबे समय से रह रहे हैं। उनका कहना है कि पास स्थित आश्रम करीब 8 महीने पहले ही बनाया गया है।

दो लोगों ने जहरीला पदार्थ खाया
कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवार के दो सदस्यों गोपाल और रेखा बाई ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया। दोनों को धामनोद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। सीएचसी की डॉक्टर श्वेता सावले के अनुसार, दोनों को प्राथमिक उपचार दिया गया। उनकी स्थिति को देखते हुए दोनों को आगे के इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है।

गर्भवती महिला और बच्चे को वाहन में बंद करने का आरोप
प्रत्यक्षदर्शियों ने कार्रवाई के दौरान एक 9 माह की गर्भवती महिला और 8 महीने के बच्चे को पुलिस वाहन में बंद करने का आरोप भी लगाया है। इस आरोप के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई। फिलहाल प्रशासन की ओर से इन आरोपों और प्रभावित परिवारों के पट्टों की वैधता को लेकर विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही पूरी तस्वीर सामने आएगी।

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