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धार के जुलवानिया खुर्द में किराए के मकान में सिमटा सरकारी स्कूल; 8 साल, 1 कमरा और 5 कक्षाएं: बिना शौचालय-मैदान के पढ़ रहे बच्चे

धार/सरदारपुर। सरकारें चाहे शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और ‘सब पढ़ें, सब बढ़ें’ के जितने भी बड़े दावे कर लें, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मध्य प्रदेश के धार जिले की सरदारपुर तहसील के ग्राम जुलवानिया खुर्द में सरकारी वादों की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है। यहां प्राथमिक स्कूल का अपना कोई भवन ही नहीं है। पिछले 8 सालों से यह सरकारी स्कूल एक किराए के निजी मकान में सिमटा हुआ है, जहां पहली से पांचवीं तक के नौनिहाल एक ही कमरे में बैठकर अपना भविष्य गढ़ने को मजबूर हैं।

दरअसल, वर्ष 2016-17 से पहले गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए जुलवानिया कलां जाना पड़ता था। रास्ते में तालाब होने के कारण बच्चों की सुरक्षा पर हमेशा खतरा बना रहता था। ग्रामीणों की मांग और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए सरकार ने 2016-17 में गांव में ही प्राथमिक स्कूल की स्वीकृति दे दी। स्कूल तो मंजूर हो गया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी भवन निर्माण की बात भूल गए। नतीजा यह हुआ कि 8 साल बीत जाने के बाद भी बच्चों को अपना खुद का स्कूल भवन नसीब नहीं हो सका।

इस एक कमरे के किराए के मकान में सुविधाओं का घोर अभाव है। पहली से पांचवीं कक्षा तक के सभी छात्र-छात्राओं की पढ़ाई एक साथ एक ही कमरे में कराई जाती है। स्कूल परिसर में न तो बच्चों के लिए शौचालय की व्यवस्था है और न ही उनके खेलने के लिए कोई मैदान। सुविधाओं के नाम पर केवल एक कमरा है, जहां बच्चे रोजाना बदहाली के बीच शिक्षा हासिल कर रहे हैं।

स्कूल की शिक्षिका अंजना सोलंकी ने बताया कि भवन निर्माण और समस्याओं को लेकर कई बार ठहराव प्रस्ताव बनाकर वरिष्ठ कार्यालयों को भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद आज तक न तो शासन की ओर से कोई सुध ली गई और न ही भवन निर्माण कार्य शुरू हो सका। जिम्मेदार अधिकारियों की इस लापरवाही का खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।

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