कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल का महंगाई पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा: निर्मला सीतारमण

केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का भारत में महंगाई पर फिलहाल बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि देश में मुद्रास्फीति पहले से ही निचले स्तर के करीब है।
लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने बताया कि फरवरी के अंत से दो मार्च के बीच कच्चे तेल की कीमत (भारतीय बास्केट) 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 80.16 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में इसका प्रभाव महंगाई पर सीमित रहने की संभावना है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मध्यम अवधि में महंगाई पर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करता है। इनमें विनिमय दर में उतार-चढ़ाव, वैश्विक मांग और आपूर्ति की स्थिति, मौद्रिक नीति के प्रभाव का उपभोक्ताओं तक पहुंचना, सामान्य मुद्रास्फीति की स्थिति और अप्रत्यक्ष प्रभाव जैसे कारक शामिल हैं।
वित्त मंत्री ने बताया कि Reserve Bank of India की अक्टूबर 2025 की मौद्रिक नीति रिपोर्ट के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें आधारभूत अनुमानों से 10 प्रतिशत अधिक हो जाती हैं और इसका पूरा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है, तो महंगाई में करीब 0.3 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि सरकार देश में महंगाई की स्थिति और वैश्विक ऊर्जा बाजार में हो रहे बदलावों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच वायदा कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 26 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 114.29 डॉलर (लगभग 10,549 रुपये) प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गईं।
सरकार का कहना है कि मौजूदा स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाए जाएंगे।






