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ब्राज़ील में शुरू हुआ COP-30 जलवायु सम्मेलन, भारत ने दिखाई स्वच्छ ऊर्जा में अग्रणी भूमिका

ब्राज़ील के बेलेम शहर में आज 30वां संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP-30) औपचारिक रूप से शुरू हुआ। यह सम्मेलन विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त, ऊर्जा संक्रमण और अनुकूलन योजनाओं पर ठोस प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।

इस बार की वार्ता का मुख्य फोकस पेरिस समझौते के क्रियान्वयन, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने और अनुकूलन रणनीतियों पर रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सम्मेलन जलवायु न्याय और टिकाऊ विकास के बीच संतुलन बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

भारत इस सम्मेलन में अपनी स्वच्छ ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी में हासिल प्रगति पर प्रकाश डालेगा। भारत ने निर्धारित समय से पहले ही 50% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल कर ली है, जो उसे विकासशील देशों में एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करती है। इसके साथ ही भारत ट्रॉपिकल फॉरेस्ट्स फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF) में एक पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में शामिल हुआ है — यह पहल वन संरक्षण को प्रोत्साहित करने और कार्बन संतुलन बनाए रखने के लिए शुरू की गई है।

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने का लक्ष्य, जो पेरिस समझौते के तहत तय हुआ था, अब अस्थायी रूप से पार हो सकता है। इससे समुद्री स्तर में वृद्धि, सूखा, बाढ़ और असामान्य मौसम की घटनाओं में इज़ाफा होने की आशंका है।

COP-30 से उम्मीद है कि यह जलवायु कार्रवाई के लिए वैश्विक स्तर पर एक नई दिशा तय करेगा — जहाँ विकासशील देशों को भी न्यायसंगत वित्तीय और तकनीकी सहायता मिले।

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