| |

सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी अब 65 वर्ष की आयु में होंगे सेवानिवृत्त, हाई कोर्ट ने 62 साल में रिटायर करने का सरकारी आदेश पलटा

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति की आयु को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। माननीय न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हसानी को 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त करने वाले राज्य सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने उन्हें अब 65 वर्ष की आयु तक निरंतर सेवा में बने रहने की अनुमति दे दी है।

क्या था पूरा मामला

डॉ. माधव प्रसाद हसानी की नियुक्ति वर्ष 1999 में संविदा ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी के पद पर हुई थी, जिसके बाद वर्ष 2005 में उनकी सेवाओं को नियमित किया गया था। अपनी लंबी सेवा के दौरान उन्होंने सिविल सर्जन और प्रशासनिक दोनों दायित्व संभाले। वर्तमान में वे इंदौर के सीएमएचओ पद पर कार्यरत हैं। शासन ने 30 जनवरी 2026 को एक आदेश जारी कर डॉ. हसानी को 31 जुलाई 2026 को 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त करने का निर्देश दिया था। शासन का तर्क था कि डॉ. हसानी ने फंडामेंटल रूल्स के तहत रेगुलर और क्लीनिकल साइड में जरूरी 20 वर्ष की सेवा पूरी नहीं की है इसलिए वे 65 वर्ष तक सेवा का लाभ नहीं पा सकते। इस आदेश को डॉ. हसानी ने वरिष्ठ अधिवक्ता वीर कुमार जैन और वैभव जैन के माध्यम से हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

जानिए हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में क्या कहा

दोनों पक्षों की दलीलें और पूर्व के न्यायिक दृष्टांतों (डॉ. कांतिलाल साहू केस) का अध्ययन करने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार ने डॉक्टरों की कमी को देखते हुए ही सेवानिवृत्ति की उम्र 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष की थी।

कोर्ट ने अपने आदेश में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु रेखांकित किए

1.नोटिफिकेशन की गलत व्याख्या – कोर्ट ने माना कि शासन 30 अप्रैल 2012 के उस संशोधन और नोटिफिकेशन को सही संदर्भ में समझने में विफल रहा है, जिसके तहत मेडिकल अफसरों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 65 वर्ष की गई थी।

2.डॉक्टरों की कमी मुख्य वजह – कोर्ट ने कहा कि राज्य में नियमित डॉक्टरों की भारी कमी है, नए डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देने से कतरा रहे हैं। ऐसी स्थिति में जब एक अनुभवी डॉक्टर (याचिकाकर्ता) 65 वर्ष तक काम करने को तैयार है, तो उन्हें इससे रोकना न्यायसंगत नहीं है।

3. 20 वर्ष की सेवा पूरी – रिकॉर्ड के अनुसार डॉ. हसानी 1999 से लगातार चिकित्सा सेवा में सक्रिय रहे हैं और उनका एक बड़ा हिस्सा क्लीनिकल क्षेत्र में ही बीता है इसलिए उनके मामले को पूर्व के डॉ. गिरधारी लाल सोढ़ी और डॉ. भूरे सिंह केस की तरह ही माना जाएगा।

कोर्ट का अंतिम आदेश

जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने आदेश दिया है कि चूंकि याचिकाकर्ता के सेवानिवृत्ति की प्रस्तावित तिथि (31 जुलाई 2026) अभी आई नहीं है, इसलिए विवादित सरकारी आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है। याचिकाकर्ता डॉ. माधव प्रसाद हसानी को 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक उनके पद पर कार्य करने की अनुमति दी जाए।

Share