क्रॉनिक बीमारी है तो नौतपा में रहें अलर्ट: हीट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा, ये 11 संकेत बिल्कुल इग्नोर न करें
नौतपा के दौरान देश के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा है। ऐसे में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, किडनी रोग, अस्थमा और अन्य क्रॉनिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए खतरा कई गुना बढ़ सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक, इन मरीजों में हीट स्ट्रोक (लू लगना) का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई क्रॉनिक मरीज ऐसी दवाएं लेते हैं, जो शरीर के तापमान नियंत्रण या पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए नौतपा में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
क्रॉनिक डिजीज वालों को ज्यादा खतरा क्यों?
डॉक्टरों के अनुसार, गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन डायबिटीज, हार्ट या किडनी मरीजों में शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कमजोर हो सकती है। इससे डिहाइड्रेशन, ब्लड प्रेशर असंतुलन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
ये 11 संकेत बिल्कुल इग्नोर न करें
अगर गर्मी में ये लक्षण दिखें तो तुरंत सतर्क हो जाएं—
- तेज सिर दर्द
- चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना
- बहुत ज्यादा कमजोरी या थकान
- शरीर का तापमान बढ़ना या तेज बुखार
- सांस लेने में दिक्कत
- दिल की धड़कन तेज होना
- उल्टी या जी मिचलाना
- पसीना बहुत ज्यादा आना या अचानक बंद हो जाना
- भ्रम, बेचैनी या बात करने में परेशानी
- मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन
- डिहाइड्रेशन—मुंह सूखना, कम पेशाब आना
किन मरीजों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए?
- डायबिटीज मरीज
- हाई BP और हार्ट पेशेंट
- किडनी रोगी
- अस्थमा या सांस संबंधी बीमारी वाले लोग
- बुजुर्ग और इम्युनिटी कमजोर लोग
बचाव के लिए क्या करें?
- खूब पानी पिएं और ORS/नींबू पानी लें
- दवाएं समय पर लें, बिना डॉक्टर सलाह बदलाव न करें
- दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप में निकलने से बचें
- सूती और हल्के कपड़े पहनें
- घर को ठंडा और हवादार रखें
- कमजोरी या असहजता लगे तो तुरंत आराम करें
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं?
अगर तेज बुखार, बेहोशी, सांस लेने में परेशानी, लगातार उल्टी, भ्रम या सीने में दर्द जैसे लक्षण हों, तो देरी न करें। डॉक्टरों के मुताबिक, क्रॉनिक मरीजों में हीट स्ट्रोक तेजी से गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए समय पर इलाज बेहद जरूरी है।





