| |

बोत्स्वाना से 8 चीते आज कूनो पहुंचे, भूपेंद्र यादव करेंगे रिलीज, संख्या बढ़कर 47

अफ्रीकी देश बोत्स्वाना से आठ चीते आज मध्य प्रदेश पहुंच रहे हैं। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव इन चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान के बाड़े में रिलीज करेंगे। इसके साथ ही भारत में चीतों की संख्या 39 से बढ़कर 47 हो जाएगी।

तीसरा बड़ा जत्था कूनो पहुंचा

जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी के अनुसार, ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत अफ्रीकी महाद्वीप से चीतों का यह तीसरा बड़ा जत्था श्योपुर जिले के कूनो में लाया जा रहा है। बोत्स्वाना से एयरलिफ्ट किए गए 8 चीते (6 मादा, 2 नर) विशेष विमान से ग्वालियर पहुंचेंगे और वहां से भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा कूनो भेजे जाएंगे।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, केंद्रीय मंत्री नई दिल्ली से रवाना होकर ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयरपोर्ट पहुंचेंगे। वहां से हेलीकॉप्टर द्वारा सुबह लगभग 10 बजे कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों को रिलीज किया जाएगा।

वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के तहत ट्रांसलोकेशन

इमिग्रेशन, कस्टम, पशु-चिकित्सा एवं सुरक्षा औपचारिकताएं पूरी होने के बाद चीतों को सुरक्षित रूप से कूनो लाया जाएगा। पार्क में उनकी लैंडिंग के लिए पांच हेलीपैड बनाए गए हैं। सभी चीते लगभग एक माह तक क्वारंटाइन में रहेंगे। पूरा अभियान वैज्ञानिक मानकों और निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार संचालित किया जा रहा है।

17 सितंबर 2022 से शुरू हुआ था ऐतिहासिक अभियान

भारत में चीतों की पुनर्स्थापना की ऐतिहासिक शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों को छोड़ा था। वर्ष 1952 में भारत में एशियाई चीतों के विलुप्त होने के बाद से उन्हें पुनः बसाने की योजना पर काम चल रहा था।

वर्ष 2010 में भारतीय वन्यजीव संस्थान ने संभावित स्थलों का सर्वेक्षण किया, जिसमें कूनो को सबसे उपयुक्त पाया गया। वर्तमान में कूनो में 36 और गांधी सागर अभयारण्य में 3 चीते मौजूद हैं।

सफल प्रजनन से बढ़ी उम्मीदें

प्रोजेक्ट अब स्थायी स्थापना और सफल प्रजनन के चरण में प्रवेश कर चुका है। भारत में जन्मी पहली वयस्क मादा ‘मुखी’ ने पांच शावकों को जन्म दिया है। ‘गामिनी’ और ‘वीरा’ जैसी अन्य मादाओं ने भी स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है।

कूनो का 750 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चीतों के लिए उपयुक्त आवास प्रदान करता है, जबकि श्योपुर और शिवपुरी जिलों का लगभग 3,000 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र उनके स्वच्छंद विचरण के लिए अनुकूल माना गया है।

अरावली पर्वत श्रृंखला से घिरा कूनो राष्ट्रीय उद्यान अपनी समृद्ध जैव विविधता, 174 पक्षी प्रजातियों और सैकड़ों वन्यजीवों के साथ नए मेहमानों के स्वागत के लिए तैयार है। बोत्स्वाना से आए ये तेज़ धावक न केवल वन पारिस्थितिकी को मजबूत करेंगे, बल्कि भारत में चीतों की ऐतिहासिक वापसी को भी नई दिशा देंगे।

Share

Similar Posts