भूदान यज्ञ के 75 साल: पवनार से पोचमपल्ली पदयात्रा, चित्रकूट पहुंचे रमेश भैया

भूदान यज्ञ के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पवनार (वर्धा) से तेलंगाना के पोचमपल्ली तक निकली पदयात्रा का कारवां चित्रकूट पहुंच गया। इस यात्रा में शामिल रमेश भैया और विमला बहन ने मंदाकनी नदी तट स्थित रामघाट पर संत विनोबा भावे को श्रद्धांजलि अर्पित की।

🚶 पदयात्रा का ऐतिहासिक महत्व

यह पदयात्रा विनोबा भावे के भूदान आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है।

  • शुरुआत: पवनार (वर्धा) स्थित ब्रह्म विद्या मंदिर
  • गंतव्य: पोचमपल्ली (तेलंगाना)

🌾 भूदान आंदोलन की प्रेरणा

रमेश भैया ने बताया कि:

  • पोचमपल्ली वह स्थान है जहां से भूदान आंदोलन की शुरुआत हुई
  • एक जमींदार ने स्वेच्छा से भूमि दान दी
  • इसके बाद विनोबा भावे ने पूरे देश में पदयात्रा कर भूमि दान का अभियान चलाया

उन्होंने कहा कि संत विनोबा करीब 13 वर्षों तक लगातार पैदल चलते रहे

📍 चित्रकूट का विशेष संबंध

रमेश भैया ने बताया कि:

  • 1952 में विनोबा भावे की पदयात्रा का पड़ाव चित्रकूट में रहा
  • सर्वोदय सेवा आश्रम इस आंदोलन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है
  • चित्रकूट को इस यात्रा का प्रमुख पड़ाव इसलिए चुना गया

🌍 “जय जगत” और ग्राम स्वराज का संदेश

रमेश भैया ने कहा:

  • मंत्र: “जय जगत”
  • लक्ष्य: विश्व शांति
  • तंत्र: ग्राम स्वराज

⚠️ वर्तमान चुनौतियों पर चिंता

सर्वोदय सेवा आश्रम के अभिमन्यु भाई ने कहा कि:

  • आज भूमि समस्या नए रूप में सामने आ रही है
  • छोटे किसान जमीन खो रहे हैं
  • नदियों और पर्यावरण पर संकट बढ़ रहा है

उन्होंने जल संकट और पर्यावरण संरक्षण पर गंभीर चिंता जताई।

🙏 स्वागत और सहभागिता

रामघाट पर पदयात्रियों का स्वागत स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और सर्वोदय आश्रम के सदस्यों ने किया।

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