भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट में तीखी बहस, मुस्लिम पक्ष ने धार्मिक अधिकार और कानून पर रखे तर्क

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक Bhojshala परिसर को लेकर चल रहे भोजशाला विवाद में Madhya Pradesh High Court की इंदौर खंडपीठ में शनिवार को सुनवाई के दौरान तीखी बहस देखने को मिली। सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष हुई, हालांकि समयाभाव के कारण कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी और अब अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
मुस्लिम पक्ष की ओर से कमाल मौला मस्जिद कमेटी के अधिवक्ता अशहर वारसी ने नया सिविल सूट दायर करते हुए भूमि के टाइटल, कब्जे और धार्मिक अधिकारों पर विस्तार से तर्क रखे। उन्होंने कोर्ट में Places of Worship Act 1991 का हवाला देते हुए कहा कि 1947 में जो धार्मिक स्थल जिस स्वरूप में था, उसे उसी रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, उस समय यह स्थल मस्जिद के रूप में स्थापित था और नमाज अदा की जाती थी।
सुनवाई के दौरान वक्फ कानून का भी उल्लेख किया गया। मुस्लिम पक्ष ने तर्क दिया कि एक बार कोई संपत्ति वक्फ घोषित हो जाती है तो वह हमेशा वक्फ ही रहती है। साथ ही यह भी कहा गया कि संपत्ति विवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आती है, और इस संबंध में धार जिला न्यायालय में पहले से ही सिविल सूट लंबित है।
दूसरी ओर, इंटरविनर के रूप में शामिल स्थानीय पक्षकारों ने भोजशाला को मंदिर बताए जाने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके समर्थन में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक पाठशाला बताया और मंदिर व शाला के बीच अंतर स्पष्ट किया।
सुनवाई के दौरान ऐतिहासिक दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए गए। मुस्लिम पक्ष ने 1935 के गजट नोटिफिकेशन और 1952 में Archaeological Survey of India द्वारा जारी दस्तावेज का हवाला देते हुए इस स्थल को मस्जिद बताया। साथ ही लंदन स्थित British Museum में रखी वाग्देवी की मूर्ति को लेकर भी दावों की सत्यता पर प्रश्न उठाए गए।
कुल मिलाकर, MP Legal News के इस अहम मामले में अभी कई बिंदुओं पर बहस बाकी है। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने का आश्वासन दिया है और अब सोमवार को होने वाली सुनवाई में इस संवेदनशील विवाद पर आगे की बहस जारी रहेगी।






