बरगी बांध हादसा: मुआवजे से नहीं, कड़े नियमों से रुकेगी मौत की ये लापरवाही

जबलपुर स्थित बरगी बांध में 30 अप्रैल की शाम हुआ दर्दनाक हादसा पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर कर रख गया। तेज आंधी और मूसलाधार बारिश के बीच एक ओवरलोडेड नाव डूब गई, जिसमें 11 लोगों की जान चली गई। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारी जल पर्यटन व्यवस्था सुरक्षित है?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाव में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया गया था। कई लोगों के पास लाइफ जैकेट तक नहीं थी, जबकि मौसम पहले से खराब हो रहा था। इसके बावजूद नाव संचालन जारी रहा, जो सीधे तौर पर गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
हादसे के बाद सरकार द्वारा मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की गई, लेकिन क्या सिर्फ मुआवजा ही समाधान है? विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं।
उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पहले से ही जल पर्यटन को लेकर सख्त नियम लागू हैं। वाराणसी के घाटों पर हर यात्री के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य है और नावों की नियमित जांच की जाती है। वहीं मध्य प्रदेश में ऐसे नियमों का पालन अब भी ढीला नजर आता है।
प्रदेश में नर्मदा नदी और अन्य जलाशयों पर बढ़ते पर्यटन के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। ओवरलोडिंग, लाइफ जैकेट की कमी और मौसम की अनदेखी जैसे कारण लगातार हादसों को जन्म दे रहे हैं।
घटना के बाद प्रशासन ने बरगी बांध में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा दी है और जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि असली सवाल यही है कि क्या इस हादसे के बाद कोई ठोस बदलाव देखने को मिलेगा?
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है। यदि समय रहते सख्त नियम नहीं बनाए गए और उनका पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो भविष्य में भी ऐसे हादसे होते रहेंगे।
अब सवाल सिर्फ हादसे का नहीं… सवाल है—जिम्मेदार कौन?






