बांग्लादेश के सुंदरबन में समुद्री डाकुओं का डेरा, दहशत में मछुआरे

बांग्लादेश के सुंदरबन क्षेत्र में एक बार फिर समुद्री डाकुओं (समुद्री दस्युओं) की सक्रियता बढ़ने से स्थानीय मछुआरों में दहशत का माहौल है। देश की लगभग 1320 किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा पर फैले इस इलाके में दर्जनों डाकू गिरोह सक्रिय बताए जा रहे हैं, जो मछुआरों से अवैध वसूली कर रहे हैं।
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, ये समुद्री डाकू मछुआरों को जंगल में प्रवेश के लिए कथित परमिट या टोकन जारी करते हैं और इसके बदले मोटी रकम वसूलते हैं। पैसा न देने पर मछुआरों का अपहरण कर यातना देने और फिरौती मांगने की घटनाएं सामने आई हैं।
बताया गया है कि 2017 में बड़े पैमाने पर समुद्री डाकुओं के आत्मसमर्पण के बाद यह प्रथा लगभग खत्म हो गई थी, लेकिन 5 अगस्त 2024 को राजनीतिक अशांति के बाद सुंदरबन में एक बार फिर डाकुओं की वापसी हो गई है।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, सुंदरबन से सटे सतखिरा, बागेरहाट और खुलना जिलों के जंगलों में 10 से अधिक समुद्री डाकू गिरोह सक्रिय हैं। ये गिरोह मछुआरों को समानांतर परमिट जारी करते हैं, जिन्हें टोकन कहा जाता है। टोकन मिलने के बाद ही मछुआरों को कुछ इलाकों से सुरक्षित गुजरने की इजाजत मिलती है।
मछुआरों ने बताया कि टोकन अक्सर एक खास सीरियल नंबर वाले करेंसी नोट के रूप में दिया जाता है, जिस पर मछुआरे का नाम लिखा होता है। हालांकि, अगर कोई दूसरा डाकू गिरोह पकड़ ले, तो पुराने टोकन का कोई महत्व नहीं रहता और नया टोकन खरीदना पड़ता है।
एक मछुआरे ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर बताया कि दो महीने पहले उसे डॉन समूह के डाकुओं ने अगवा कर लिया था और दो दिन तक बंधक बनाकर रखा। उसे छुड़ाने के लिए परिवार को 40,000 टका चुकाने पड़े।
2017 में आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व समुद्री डाकू आलम सरदार ने टोकन प्रथा की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि टोकन दिखाने पर डाकू मछुआरों को छोड़ देते हैं, लेकिन बिना टोकन के अपहरण का खतरा बना रहता है। उन्होंने बताया कि टोकन के बदले 10,000 से 50,000 टका वसूले जाते हैं, जबकि बिना टोकन पकड़े जाने पर 20,000 से 2,00,000 टका तक की फिरौती ली जाती है।
स्थिति बिगड़ने पर बांग्लादेश तटरक्षक बल ने इंटेलिजेंस-आधारित अभियान तेज कर दिए हैं। दो जनवरी को डाकुओं ने दो पर्यटकों और एक इको रिजॉर्ट मालिक का अपहरण कर लिया था, जिन्हें 48 घंटे के भीतर छुड़ाया गया।
तटरक्षक बल के अनुसार, वर्ष 2025 में 38 हथियार, दो हैंड ग्रेनेड, 74 स्थानीय हथियार और 448 राउंड गोला-बारूद बरामद कर 52 बंधकों को मुक्त कराया गया है।
वन विभाग और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने सुंदरबन में समुद्री डाकुओं की मौजूदगी स्वीकार की है, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अब तक इस टोकन सिस्टम को लेकर कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।






