अयोध्या में रामनवमी पर 1251 कुण्डीय महायज्ञ, सनातन पुनर्जागरण का ऐतिहासिक आयोजन

अयोध्या एक बार फिर सनातन परंपरा के भव्य आयोजन का केंद्र बनने जा रही है। यहां 20 से 28 मार्च तक 1251 कुण्डीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ सह हनुमत-श्रीराम महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा, जो रामनवमी के पावन पर्व पर विशेष रूप से आयोजित होगा।
इस महाआयोजन को सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है। आयोजन के संयोजक और उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि यह महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास है।
🕉️ भक्ति और वैदिक परंपरा का संगम
रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव को वैदिक विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान
भजन-कीर्तन
संतों के प्रवचन
धार्मिक कथाएं
पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देंगी।
🔥 1251 कुण्डों में आहुतियां
महायज्ञ के दौरान 1251 कुण्डों में एक साथ दी जाने वाली आहुतियां वातावरण को वैदिक मंत्रों से गुंजायमान करेंगी, जिससे त्रेता युग की अनुभूति का आभास होगा।
🌍 विश्वगुरु बनने का संदेश
दयाशंकर सिंह के अनुसार, अयोध्या से उठने वाली यह आस्था की ध्वनि पूरे विश्व में सनातन धर्म के मूल्यों को पहुंचाएगी और भारत को पुनः आध्यात्मिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगी।
🙏 विशिष्ट उपस्थिति
इस महायज्ञ में प्रमुख रूप से लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी की उपस्थिति रहेगी। उनके सान्निध्य में वैदिक अनुष्ठान और प्रवचन श्रद्धालुओं को सनातन धर्म की गहराई से जोड़ेंगे।
📿 विशेष आयोजन
इस दौरान श्रीरामानुजाचार्य सहस्त्राब्दी जयंती महोत्सव भी मनाया जाएगा, जो भक्ति, समर्पण और समरसता के संदेश को आगे बढ़ाएगा।
📌 महत्व
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत की आस्था, संस्कृति और परंपरा के पुनर्जागरण का प्रतीक भी माना जा रहा है।






