आंध्र प्रदेश में 16 हजार करोड़ की AMCA रक्षा परियोजना का शिलान्यास, भारत को मिलेगा स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट बूस्ट

भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को नई मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए Rajnath Singh ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साईं जिले के पुट्टपर्थी में लगभग 15,803 करोड़ रुपये की एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना की आधारशिला रखी। इस दौरान N. Chandrababu Naidu और मंत्री Nara Lokesh भी मौजूद रहे।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान कार्यक्रम को गति देने के लिए शुरू की गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस परियोजना से करीब 7,500 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने की उम्मीद है। AMCA परियोजना के साथ-साथ ड्रोन सिटी परियोजना और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी अन्य परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया गया।
कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री ने रक्षा उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसमें अत्याधुनिक मिसाइलें, हैंड ग्रेनेड, उन्नत हथियार, फाइटर जेट प्रोटोटाइप और स्वदेशी रक्षा उपकरण प्रदर्शित किए गए।
क्या है AMCA परियोजना?
Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का दो इंजन वाला स्टील्थ मल्टीरोल लड़ाकू विमान कार्यक्रम है, जिसे भारतीय वायुसेना और नौसेना की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का नेतृत्व Aeronautical Development Agency (ADA) कर रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, AMCA को Lockheed Martin F-35 Lightning II, Chengdu J-20 और Sukhoi Su-57 जैसे आधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमानों की क्षमता को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जा रहा है।
इस विमान में सुपरक्रूज क्षमता, इंटरनल वेपन्स बे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक, उन्नत सेंसर और कम रडार पहचान जैसी अत्याधुनिक खूबियां होंगी।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना के तहत विमान के इंटीग्रेशन, परीक्षण, सत्यापन और प्रमाणन के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे कार्यक्रम की रफ्तार बढ़ेगी।
अधिकारियों के मुताबिक, AMCA का पहला प्रोटोटाइप वर्ष 2028 तक तैयार होने की संभावना है, जबकि 2035 तक इसे भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्रालय का कहना है कि यह परियोजना भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।






