एआई से बनी कैंसर की दवा का इंसानों पर होगा परीक्षण, अल्फाबेट की कंपनी आइसोमॉर्फिक लैब्स शुरू करेगी परीक्षण

गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट की सहायक कंपनी आइसोमॉर्फिक लैब्स जल्द ही एआई से विकसित की गई कैंसर की दवा पर मानव परीक्षण शुरू करने जा रही है। यह दवा कंपनी ने गूगल डीपमाइंड के अल्फाफोल्ड 3 उपकरण की मदद से तैयार की है। इस उन्नत एआई उपकरण का उपयोग जटिल प्रोटीन संरचनाओं और आणविक इंटरैक्शन को समझने के लिए किया जाता है।
आइसोमॉर्फिक लैब्स के अध्यक्ष कॉलीन मर्डोक ने हाल ही में एक साक्षात्कार में बताया कि कंपनी पहले मरीजों को यह एआई-निर्मित दवा देने की तैयारी कर रही है और परीक्षण से पहले टीम का विस्तार भी किया जा रहा है।
यह एआई आधारित दवा कैंसर के इलाज में अहम भूमिका निभा सकती है, क्योंकि ऑन्कोलॉजी दवाएं या तो कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती हैं या उनके विकास को धीमा कर देती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर में लगभग 2 करोड़ नए कैंसर मामले और 97 लाख कैंसर से संबंधित मौतें दर्ज की गई थीं।
एआई तकनीक की मदद से दवा खोजने की प्रक्रिया को तेज और सस्ता बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आइसोमॉर्फिक लैब्स ने अल्फाफोल्ड 3 का उपयोग कर अपनी एआई दवा डिज़ाइन तकनीक को आगे बढ़ाया है। मार्च 2024 में कंपनी ने थ्राइव कैपिटल के नेतृत्व में 600 मिलियन डॉलर (लगभग 5000 करोड़ रुपये) की निधि जुटाई थी, जिसका उपयोग इसी दिशा में किया गया।
कंपनी ने नोवार्टिस और एली लिली जैसी दवा कंपनियों के साथ 3 अरब डॉलर से अधिक की साझेदारी की है। इसका लक्ष्य है एक एआई आधारित विश्व-स्तरीय दवा डिज़ाइन तंत्र तैयार करना, जो नई दवाएं कम लागत और अधिक सफलता दर के साथ बना सके।
आइसोमॉर्फिक लैब्स के सीईओ और डीपमाइंड के प्रमुख डेमिस हासाबिस ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य है कि एआई की मदद से एक दिन सभी बीमारियों का समाधान ढूंढ़ा जा सके।
एआई से दवा खोजने के क्षेत्र में कई अन्य जैव-प्रौद्योगिकी कंपनियां जैसे एनीमा बायोटेक, इक्तोस, और नोवो नॉर्डिस्क भी सक्रिय हैं। नोवो नॉर्डिस्क ने वैलो हेल्थ के साथ 2.76 अरब डॉलर की साझेदारी की है, ताकि एआई के ज़रिए दवा विकास को तेज़ किया जा सके।
ग्लोबलडाटा के अनुसार, अब तक 3000 से अधिक दवाएं एआई की मदद से तैयार या पुनः विकसित की जा चुकी हैं, हालांकि इनमें से अधिकांश अभी प्रारंभिक चरण में हैं और मानव परीक्षण बाकी हैं।
आइसोमॉर्फिक लैब्स का यह कदमएआई आधारित जैव-प्रौद्योगिकी के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकता है।






