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भारत–पराग्वे ने आतंकवाद विरोधी सहयोग और द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने पर जताई सहमति

भारत और पराग्वे ने द्विपक्षीय स्तरों पर आतंकवाद का मुकाबला करने की अपनी प्रतिबद्धता मजबूत की है। असुनसियन में आयोजित संयुक्त आयोग तंत्र की पहली बैठक में दोनों देशों ने कहा कि आतंकवाद अपने सभी रूपों में अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा है। बैठक में यह भी दोहराया गया कि भारत पराग्वे आतंकवाद सहयोग को और प्रभावी बनाने के लिए समन्वित वैश्विक प्रयास जरूरी हैं।

इस बैठक की सह-अध्यक्षता पराग्वे के उप विदेश मंत्री विक्टर वर्दुन और भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) पेरियासामी कुमारन ने की। बैठक में दोनों देशों ने सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और सामरिक संवाद को मजबूत करने पर सहमति जताई। यह कदम भारत पराग्वे द्विपक्षीय संबंध को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रतिनिधिमंडलों ने व्यापार, ऊर्जा, कृषि व्यवसाय, फार्मा, जैव ईंधन, आईसीटी और विनिर्माण सहित कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं की समीक्षा की। दोनों देशों ने माना कि भारत–पराग्वे संयुक्त आयोग बैठक भविष्य में व्यापार और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि लाने में सहायक होगी। बैठक में यह भी कहा गया कि उच्च-स्तरीय राजनीतिक संवाद द्विपक्षीय साझेदारी को और गहराई देगा।

पराग्वे ने भारतीय निवेश को प्रोत्साहित करने की अपनी इच्छा दोहराई और निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कांसुलरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने पर सहमति जताई। इस कदम से पराग्वे में भारतीय निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। भारत और पराग्वे ने यह भी कहा कि बढ़ता निवेश दोनों देशों की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

दोनों पक्षों ने यह भी स्वीकार किया कि वैश्विक चुनौतियों के दौर में व्यापार, सुरक्षा और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना समय की मांग है। बैठक में तय किए गए नए उपाय भारत–पराग्वे साझेदारी को एक नए युग में प्रवेश कराने का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

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