बड़वानी में किसानों ने किया हाईवे जाम: कलेक्ट्रेट का गेट बंद मिलने पर भड़के किसान; SDM को ज्ञापन सौंपा

बड़वानी। कलेक्ट्रेट का गेट बंद मिलने और ज्ञापन लेने के लिए अधिकारी के मौजूद नहीं होने से नाराज किसानों ने हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के बैनर तले जिलेभर से किसान कृषि उपज मंडी में जुटे थे। सभा के बाद किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली और मोटरसाइकिल से कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। करीब 20 मिनट तक खंडवा-बड़ौदा स्टेट हाईवे और सेंधवा राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। बाद में एसडीएम भूपेंद्र सिंह रावत को ज्ञापन सौंपा गया।
कलेक्ट्रेट का गेट बंद मिलने पर बढ़ा आक्रोश
किसानों ने कृषि उपज मंडी में सभा के बाद तख्तियां लेकर नारेबाजी की और कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। किसानों के मुताबिक वे कलेक्टर से मिलकर ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन कलेक्ट्रेट का गेट बंद था और ज्ञापन लेने के लिए कोई अधिकारी मौके पर नहीं आया। इसके बाद किसानों ने कार्यालय के बाहर नारेबाजी शुरू कर दी और सड़क पर आकर प्रदर्शन किया।
ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी कर करीब 20 मिनट किया चक्काजाम
नाराज किसानों ने कलेक्टर कार्यालय से नीचे आकर खंडवा-बड़ौदा स्टेट हाईवे और सेंधवा राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी कर दीं। किसान सड़क पर बैठ गए और शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। करीब 20 मिनट तक चले चक्काजाम से यातायात प्रभावित हुआ।
मौके पर एसडीएम भूपेंद्र सिंह रावत, तहसीलदार राहुल सोलंकी और पुलिस प्रशासन मौजूद रहा।
एसडीएम को सौंपा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन
किसानों के कुछ देर तक कलेक्टर को ही ज्ञापन देने की मांग पर अड़े रहने के बाद आखिरकार उन्होंने एसडीएम भूपेंद्र सिंह रावत को ज्ञापन सौंपा। एसडीएम ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को शासन स्तर पर भेजा जाएगा। एसडीएम भूपेंद्र सिंह रावत ने बताया कि किसानों ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है, जिसे जल्द शासन स्तर पर भेजा जाएगा।
स्वामीनाथन रिपोर्ट से लेकर फसल मुआवजे तक की मांग
किसानों ने ज्ञापन में कई मांगें रखीं। इनमें स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करना, एमएसपी पर उपज की खरीदी, खाद-बीज और कृषि सिंचाई सामग्री के दाम कम करना, नहरों में पानी छोड़ना और खराब नहरों की मरम्मत शामिल हैं। इसके अलावा अतिवृष्टि से खराब हुई फसलों का मुआवजा देने की मांग भी किसानों ने की।
1 दिसंबर को बड़े आंदोलन की चेतावनी
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो 1 दिसंबर को जिला मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। संगठन ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।