राहुल गांधी से बोलीं सेंधवा की प्रियंका- हॉस्टल में रोटी के साथ लाल मिर्च की चटनी खाकर गुजारा किया; सीट नहीं मिली तो छात्राओं ने पढ़ाई छोड़ी

सेंधवा। इंदौर के भारत जोड़ो मैदान पर शनिवार को हुए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में सेंधवा विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत पाड़छा निवासी छात्रा प्रियंका सेंगर ने राहुल गांधी से संवाद किया।
प्रियंका ने आदिवासी क्षेत्रों सहित बड़े शहरों में आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए संचालित सरकारी हॉस्टलों में सीटों की कमी, भोजन और अन्य सुविधाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने हॉस्टलों की संख्या और सीटें बढ़ाने की मांग रखी।
प्रियंका ने बताया कि उन्होंने कक्षा 1 से 12वीं तक सरकारी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की है। हॉस्टल में कई बार भोजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने पर घर से लाई लाल मिर्च की चटनी के साथ रोटी खाकर गुजारा करना पड़ता था। उनका आरोप है कि हॉस्टल में छात्राओं से वार्डन द्वारा काम भी करवाया जाता है।
हॉस्टल नहीं मिलने पर किराए के कमरे में रहना पड़ा
प्रियंका ने बताया कि 12वीं के बाद कॉलेज की पढ़ाई के लिए सरकारी हॉस्टल नहीं मिलने पर छात्राओं को मजबूरी में किराए के कमरे लेने पड़ते हैं। किराया पहले खुद देना पड़ता है। सरकार की ओर से मिलने वाला आवास भत्ता साल के अंत में मिलता है और यह तय राशि होती है। जबकि वास्तविक किराया इससे अधिक होता है। प्रियंका ने कहा कि उनके परिवार को भी पढ़ाई का खर्च जुटाने के लिए कभी मां के जेवर तो कभी पिता का खेत गिरवी रखना पड़ा। उनके साथ की कई छात्राएं आर्थिक परेशानी के कारण पढ़ाई छोड़कर घर लौट गईं।
3 साल की उम्र में आंख में चला गया था चूना, इलाज का दिया भरोसा
राहुल गांधी ने बातचीत के दौरान प्रियंका से उनकी आंख की समस्या के बारे में भी पूछा। प्रियंका ने बताया कि करीब 3 साल की उम्र में गलती से खाने वाला चूना उनकी दाईं आंख में चला गया था, जिससे आंख खराब हो गई। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उसका इलाज नहीं हो सका। इस पर राहुल गांधी ने इलाज में मदद का भरोसा दिलाया।
सुविधा नहीं होने से कई छात्राओं ने छोड़ी पढ़ाई
प्रियंका ने बताया कि सरकारी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने के कारण वह इन समस्याओं को करीब से जानती हैं। उनके मुताबिक, 12वीं तक उन्हें हॉस्टल मिल गया था, लेकिन साथ पढ़ने वाली कई छात्राओं को सुविधा नहीं मिली और उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी।
नेट-सेट की तैयारी कर रही
12वीं के बाद कॉलेज के लिए हॉस्टल नहीं मिलने पर किराए के कमरे में रहकर पढ़ाई करने की परेशानी का सामना उन्होंने खुद भी किया है। प्रियंका ने एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई पूरी कर ली है और वर्तमान में इंदौर में प्रोफेसर बनने के लिए नेट-सेट की तैयारी कर रही हैं।