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इंदौर कलेक्ट्रेट की सुरक्षा में चूक: युवक ने की आत्मदाह की कोशिश; केस दर्ज, जेल भेजा

इंदौर। कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार की जनसुनवाई के दौरान युवक ने आत्महत्या की कोशिश की। इस घटना से सिर्फ प्रशासन ही नहीं, बल्कि पूरा सुरक्षा तंत्र सवालों के घेरे में है। केरोसिन डालने वाले युवक को गिरफ्तार कर पंढरीनाथ थाने भेज दिया है।

शिकायत लेकर पहुंचा युवक अपने साथ केरोसिन लेकर प्रशासनिक संकुल के अंदर चला गया। जनसुनवाई के दौरान खुद पर केरोसिन डालकर आत्मदाह करने लगा। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने युवक को पकड़ लिया

कलेक्टर कार्यालय कोई सामान्य सार्वजनिक परिसर नहीं है। इसी प्रशासनिक संकुल में कलेक्टर कार्यालय के साथ कई महत्वपूर्ण विभागों के दफ्तर हैं। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक प्रशासनिक संकुल में कलेक्टर कार्यालय समेत कई जिला स्तरीय कार्यालय संचालित होते हैं।

धोखाधड़ी की शिकायत करने गया था
आत्मदाह की कोशिश करने वाले युवक का नाम आकाश है। वह जामनिया खुर्द का रहने वाला है। उसका आरोप है कि शुभम और गोलू कुशवाहा ने डीजे और गाड़ी के नाम पर 11.20 लाख  का सौदा कर धोखाधड़ी की। आरोपियों ने 2 लाख नगद और कोरे चेक लेने के बाद दिखाई गई गाड़ी की जगह दूसरी गाड़ी सौंप दी। डीजे थमा दिया।


रुपए लेने के बाद भी देते रहे धमकी 

नया सामान देने के नाम पर 2.10 लाख  खर्च कराए। बाद में 98 हजार भी ऐंठ लिए। इसके बाद भी गाड़ी उठाने की धमकियां देते रहे। इस धोखाधड़ी और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर युवक ने आत्मदाह करने का फैसला लिया।

नहीं था लिखित अनुबंध
आठ महीने में पूरी रकम नहीं चुकाने पर दोनों पक्षों के बीच दोबारा बातचीत हुई। चार महीने का समय देने की बात कही गई। इसके बाद लगभग 16 महीने बाद भी पूरी राशि का भुगतान नहीं हो सका। इससे दूसरे पक्ष ने वाहन और डीजे वापस ले लिया। 

घटना के बाद उठे सवाल
सवाल सीधा है- अगर कोई व्यक्ति अपने साथ केरोसिन लेकर परिसर में पहुंच सकता है तो सुरक्षा जांच कितनी गंभीर है? क्या प्रवेश द्वार पर सिर्फ व्यक्ति और वाहन की औपचारिक जांच हो रही है? क्या बैग और सामान की जांच होती है? क्या संदिग्ध तरल पदार्थों की पहचान के लिए कोई व्यवस्था है? और सबसे गंभीर सवाल ये कि अगर केरोसिन की जगह कोई व्यक्ति एसिड लेकर अंदर पहुंच जाए तो? या कोई दूसरा ज्वलनशील या खतरनाक पदार्थ लेकर कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच जाए तो सुरक्षा व्यवस्था उसे कैसे रोक पाएगी?

कैसे होगी कलेक्टर और अधिकारियों की सुरक्षा 
यह घटना सिर्फ जनसुनवाई में मौजूद आम लोगों की सुरक्षा का मामला नहीं है। कलेक्टर और तमाम वरिष्ठ अधिकारियों की सुरक्षा भी इससे सीधे जुड़ी है। जनसुनवाई में बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते हैं। पुलिस की जनसुनवाई में भी प्लॉट-मकान विवाद, वित्तीय धोखाधड़ी और पारिवारिक विवाद जैसे मामलों में बड़ी संख्या में लोग आवेदन लेकर पहुंचते रहे हैं। ऐसे माहौल में किसी व्यक्ति के हाथ में ज्वलनशील पदार्थ का परिसर के भीतर तक पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी माना जाना चाहिए।

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