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अनूपपुर में 5 बार फ्लाईओवर का भूमिपूजन: 10 साल बाद भी अधूरा; बोरवेल में पहुंच रहा सेप्टिक टैंक का पानी

सूर्यांश तिवारी। अनूपपुर। रेलवे फाटक के पास बन रहा फ्लाईओवर 10 साल बाद भी अधूरा है। जिस काम को 24 महीने में पूरा होना था वह 120 महीने बाद भी पूरा नहीं हो सका। इसका निर्माण कार्य 2017 में शुरू हुआ था।

फ्लाईओवर के कारण लोगों को सुविधा से ज्यादा परेशानी हो रही है। इसके दोनों तरफ सड़क और नाली की व्यवस्था नहीं है। बारिश के सीजन में रहवासी कीचड़ से परेशान हैं। जलभराव के कारण बोरिंग के पानी में झाग उठ रहा है।

हकीकत जानने के लिए हम फ्लाईओवर के पास पहुंचे। रहवासियों से बात की। पता चला कि निर्माण के कारण रास्ता बंद है। वैकल्पिक सड़क की व्यवस्था भी नहीं की गई है। गंदा पानी जमा हो रहा है। सेप्टिक टैंक का पानी बोरवेल में पहुंच रहा है।

पहले पढ़ें वो 2 सवाल जो स्थानीय लोगों ने प्रदेश प्रकाश रिपोर्टर से किए…।

  1. परियोजना की लागत 12 से 30 करोड़ पहुंच गई। पूरा होने की समय-सीमा कौन तय करेगा?
  2. निर्माण में देरी के लिए जिम्मेदारी किसकी है। घर में आ रहे गंदे पानी की समस्या का समाधान कब होगा?

12 करोड़ का काम 30 करोड़ में
फ्लाईओवर का निर्माण 2017 में शुरू हुआ था। इसे 24 महीने में पूरा किया जाना था। निर्धारित समय सीमा के 10 साल बाद भी काम अधूरा है। प्रारंभिक लागत 12 करोड़ थी। अब यह बढ़कर 30 करोड़ के आसपास पहुंच गई है।



फ्लाईओवर का 5 बार हो चुका भूमि पूजन
रहवासियों का आरोप है कि कई बार भूमि पूजन हुआ। अधिकारी जब निरीक्षण करने आते हैं तब 2 महीने में काम पूरा करने की बात कहते हैं। लेकिन जमीनी स्थिति नहीं बदली।

सड़क नहीं, कीचड़ से निकलना पड़ता है
फ्लाईओवर निर्माण स्थल पर खुले में लोहे पड़े हैं। बारिश के दौरान रास्ता खराब हो जाता है। सभी को कीचड़ से होकर निकलना पड़ता है। दोपहिया गाड़ी से दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यहां से निकलना मुश्किल है।

नाली नहीं होने से घरों में भरा पानी
स्थानीय निवासी आयुषी मिश्रा कहती हैं- ‘घर के बाहर नाली नहीं है। इससे गंदा पानी जमा हो जाता है। कई जगह सेप्टिक टैंक ओवरफ्लो होने लगे हैं। गंदा पानी जमीन में रिसकर बोरवेल तक पहुंच रहा है।’

कैसे पिएं झाग वाला पानी
आयुषी मिश्रा आगे कहती हैं कि नल से आने वाला पानी भी सही नही है। बाल्टी में पानी भरने पर झाग बनने लगता है। कुछ घरों में पानी से फर्श पीला पड़ गया है। इस पानी का उपयोग नहाने और पीने में करना पड़ रहा है। छोटे बच्चों की सेहत को लेकर चिंता बनी हुई है। हम चाहते हैं कि पानी की जांच हो। साथ ही गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था  की जाए।

जिम्मेदारी से भाग रहे अधिकारी-ठेकेदार
इतना ही नहीं स्थानीय रहवासी आशीष माझी कहते हैं- हमने समस्या की शिकायत की तो प्रशासनिक अधिकारी ठेकेदार के पास भेज दिए। ठेकेदार के पास पहुंचे तो उन्होंने प्रशासन की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ लिया। ऐसे में समझ नहीं आ रहा कि सड़क, नाली और पानी की समस्या का समाधान कौन करेगा।

रेलवे फाटक बंद, दो हिस्सों में बंटा शहर
रेलवे फाटक शहर के बीचों-बीच है। यह रोड मुख्य सड़क को शहर के दूसरे हिस्सों से जोड़ता है। फ्लाईओवर निर्माण के दौरान फाटक बंद होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। जिला अस्पताल जाने वाले मरीजों, न्यायालय पहुंचने वाले पक्षकारों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों को अब 5 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है। मुख्य बाजार पर भी इसका असर पड़ा है। कारोबारियों का कहना है कि रास्ता बंद होने से ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई है। व्यापार में नुकसान हो रहा है।

पांच बार हो चुका भूमि पूजन
फ्लाईओवर निर्माण को लेकर कई बार भूमि पूजन और निरीक्षण हो चुका है। कलेक्टर, एसडीएम और अन्य अधिकारी मौके का जायजा ले चुके हैं। इसके बाद भी निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा नहीं हो पाया।

स्टेशन से 500 मीटर दूर पुल
अधूरा फ्लाईओवर अनूपपुर स्टेशन से करीब 500 मीटर दूर है। कोयला खदानों के कारण रोजाना 100 से ज्यादा मालगाड़ियां गुजरती हैं। इससे रेलवे फाटक दिन में 16 घंटे तक बंद रहता है।

रिश्ववतखोरी से ठेकेदार परेशान
BJP में इतनी रिश्वतखोरी है कि ठेकेदार परेशान हो जाते हैं। इनका दबाव रहता है। अगर ये साफ-सुथरे होते, ठेकेदारों से लेन-देन नहीं हुआ होता तो कंपनी को ब्लैकलिस्ट कराते। विभाग से जवाब मांगते। कार्रवाई कराते लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। इससे समझ आता है कि विभाग, प्रशासन और भाजपा के मंत्री, विधायक, मंडल, कमंडल, सब मिले हुए हैं। अपना-अपना कमीशन लेके मुंह बंद कर लेते हैं। इनकी वजह से जनता 10 साल से परेशान हो रही है।



अब जल्द जनता फ्लाईओवर से दौड़ेगी
शुरुआत में तीन-चार साल मामला कहानियों में रहा। फिर गड्ढे खुदे, पिलर खड़े हुए। मुआवजे का विवाद था।पहले डिजाइन चौड़ा था जिसे जनता की मांग के बाद संकरा किया गया। अब जल्द जनता को फ्लाईओवर की सुविधा मिलेगी। क्योंकि जितनी भी समस्याएं थी अब सॉल्व हो गई हैं।

कलेक्टर-एसडीएम से नहीं मिला जवाब
31 अगस्त सोमवार को रिपोर्टर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। यहां कर्मचारी ने टीएल मीटिंग और अन्य व्यस्तता बताकर रिपोर्टर को मिलने से रोक दिया। एक हफ्ते तक कलेक्टर-एसडीएम को कॉल किया गया। लेकिन फोन रिसीव नहीं हो सका। वॉइस मैसेज के जरिए भी पक्ष जानने का प्रयास किया लेकिन रिस्पॉन्स नहीं मिला।

सांसद विदेश में हैं, 10 सितंबर बाद मिलना
फ्लाईओवर की स्थिति और स्थानीय लोगों की समस्याओं को लेकर सांसद का पक्ष जानने के लिए भी संपर्क करने का प्रयास किया गया। इस दौरान पता चला कि सांसद विदेश में हैं। 10 सितंबर बाद आएंगे।

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