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राम मंदिर ट्रस्ट में नए ट्रस्टी: रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने पहले CEO; ऑपरेशन सिंदूर के कमांडर रहे

लखनऊ। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने तीन नए ट्रस्टी नियुक्त किए हैं। यह फैसला बुधवार को हुई बैठक में लिया गया। नए ट्रस्टियों में दिल्ली के महेश भगचंदका, अयोध्या के मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं।

इसी बैठक में ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को पहला CEO नियुक्त किया है। वह राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन और कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे।

38 साल से ज्यादा वायुसेना में सेवा दी
जितेंद्र मिश्रा दिसंबर 1986 में भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के तौर पर शामिल हुए थे। उन्होंने करीब 38 साल तक वायुसेना में सेवा दी। वह वायुसेना में कई अहम पदों पर रहे। वह वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख भी रहे। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने इसी कमांड की जिम्मेदारी संभाली थी।

अब मंदिर के प्रशासन की जिम्मेदारी
CEO के तौर पर जितेंद्र मिश्रा के सामने कई बड़ी जिम्मेदारियां होंगी। उन्हें मंदिर के प्रशासन और रोजाना के कामकाज की निगरानी करनी होगी। श्रद्धालुओं की व्यवस्था, मंदिर से जुड़े प्रोजेक्ट और अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल भी उनकी जिम्मेदारी होगी। ट्रस्ट की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना भी उनके काम का अहम हिस्सा होगा।

दान विवाद के बाद ट्रस्ट में बदलाव
CEO की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब मंदिर में दान से जुड़े विवाद के बाद ट्रस्ट की व्यवस्था पर सवाल उठे थे। दान की गिनती से जुड़े मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

विवाद के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कुछ पदाधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद ट्रस्ट ने प्रशासन और वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई बदलाव शुरू किए। CEO की नियुक्ति भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

5,585 आवेदनों में से चुने गए जितेंद्र मिश्रा
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए 5,585 आवेदन मिले थे। इसके बाद उम्मीदवारों की कई स्तर पर जांच की गई। एक चयन समिति ने उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग और इंटरव्यू किए। अंतिम चरण में तीन नाम ट्रस्ट के सामने रखे गए थे। इनमें से जितेंद्र मिश्रा को CEO चुना गया।

CEO के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस प्रमोद कोहली शामिल थे। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और पूर्व परमाणु वैज्ञानिक सुरेश हवारे भी समिति में थे।

CEO के पास होंगी अहम जिम्मेदारियां
राम मंदिर के CEO की जिम्मेदारी काफी अहम होगी। उन्हें मंदिर के प्रशासन और कामकाज की निगरानी करनी होगी।श्रद्धालुओं की व्यवस्था, मंदिर से जुड़े प्रोजेक्ट और अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल भी CEO की जिम्मेदारी होगी।

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