झाबुआ में प्रदूषण की शिकायत पर फैक्ट्रियों में छापा: दूषित पानी मिला; फायर सेफ्टी और पैकेजिंग में भी खामियां

झाबुआ। मेघनगर में प्रदूषण की शिकायतों के बाद SDM अवधंती प्रधान और नगर परिषद CMO ने  प्रशासनिक अमले के साथ औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की। SDM और CMO की टीम ने तहसीलदार विजयकांत पांडे के साथ बिना पूर्व सूचना के क्षेत्र की दो औद्योगिक इकाइयों मध्य भारत फास्फेट और सिद्धिविनायक का औचक निरीक्षण किया।

प्रशासन ने अचानक निरीक्षण कर कार्रवाई की। निरीक्षण के दौरान दोनों इकाइयों में दूषित पानी, फायर सेफ्टी और माल की पैकेजिंग से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आईं। मौके पर मिली कमियों को लेकर अधिकारियों ने फैक्टरी प्रबंधन से जवाब मांगा। साथ ही प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी दी।

फैक्टरी में प्रदूषित पानी का डिस्चार्ज शून्य 
मध्य भारत फास्फेट में निरीक्षण के दौरान फैक्टरी से निकलने वाले पानी को लेकर अधिकारियों से सवाल किए गए। फैक्टरी प्रबंधन की ओर से दावा किया गया कि इकाई से प्रदूषित पानी का डिस्चार्ज शून्य है और मौके पर जमा पानी मजदूरों के हाथ-पैर धोने से निकला है।

हालांकि, मौके की स्थिति को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों ने सवाल उठाए। एसडीएम ने पॉल्यूशन बोर्ड के नियमों और निर्देशों की जानकारी मांगी तो कंपनी अधिकारियों ने ऐसे निर्देशों की जानकारी होने से इनकार किया। इसके बाद एसडीएम ने मोबाइल पर संबंधित निर्देशों की कॉपी दिखाकर अधिकारियों से जवाब मांगा।

सिद्धिविनायक के पीछे नाली में बहता मिला काला पानी
तहसीलदार विजयकांत पांडे ने सिद्धिविनायक कारखाने के आसपास गहन निरीक्षण किया। फैक्टरी के पीछे नालियों में काला और प्रदूषित पानी बहता हुआ मिला। प्रशासन के अनुसार, पानी के संपर्क में आने से आसपास की झाड़ियां और वनस्पति भी प्रभावित हुई थीं।

पानी के स्रोत को लेकर कंपनी कर्मचारियों से पूछताछ की गई। कर्मचारियों द्वारा पानी को फैक्टरी का होने से इनकार करने पर तहसीलदार ने मामले की उचित कानूनी जांच कराने की चेतावनी दी।

माल की बोरियों पर MRP और बैच नंबर नहीं
निरीक्षण के दौरान फैक्टरी से परिवहन किए जा रहे माल को लेकर भी सवाल खड़े हुए। सिद्धिविनायक कारखाने से एक आईसर वाहन में लोड किए जा रहे माल की बोरियों और पैकेट्स पर मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट, MRP और बैच नंबर जैसी जानकारी नहीं मिली।

कंपनी अधिकारियों ने इसे यूनिट टू यूनिट ट्रांसफर किया जा रहा माल बताते हुए इन विवरणों की आवश्यकता नहीं होने की बात कही। प्रशासन ने इस संबंध में भी नियमों के मुताबिक जांच की बात कही है।

फायर सेफ्टी में भी मिली लापरवाही
दोनों औद्योगिक इकाइयों में फायर सेफ्टी व्यवस्था का भी निरीक्षण किया गया। प्रशासन के अनुसार, आग से बचाव के लिए आवश्यक इंतजामों में कमी पाई गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी आपात स्थिति में इससे बड़ी जनहानि का खतरा पैदा हो सकता है।

जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि जनस्वास्थ्य, पर्यावरण और जल स्रोतों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों की जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।

प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Share