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इंदौर में मास्टर प्लान रोड के बीच आया केडिया का बंगला: सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोप; हाईकोर्ट बोला-‘क्लीन हैंड’

इंदौर। देश की टॉप-10 शराब कंपनियों में शामिल केडिया ग्रुप के मालिक आनंद कुमार केडिया का इंदौर स्थित बंगला विवादों में है। बंगला परिसर में सरकारी जमीन शामिल होने की बात सामने आई है। इसे लेकर आनंद केडिया ने हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त सहित कई अधिकारियों को पक्षकार बनाया था।

हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि याचिका ‘क्लीन हैंड’ यानी साफ नीयत के साथ नहीं लगाई गई। केडिया ग्रुप की कंपनी एसोसिएटेड एल्कोहल एंड ब्रेवरेज लिमिटेड के प्रमोटर आनंद केडिया और प्रसन्ना केडिया हैं। ग्रुप की एक अन्य कंपनी ग्रेट गेलियन लिमिटेड को विनय और रतन केडिया संभालते हैं।

आनंद केडिया अप्रैल महीने से अपने बंगले को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका बिचौली हप्सी इलाके में करीब 1.452 हेक्टेयर जमीन पर करोड़ों रुपए की कीमत का बंगला बना हुआ है। विवाद इसी जमीन को लेकर है। आरोप है कि जमीन के कुछ हिस्से में सरकारी जमीन भी शामिल है।

कहां से शुरू हुआ विवाद
इंदौर नगर निगम होटल प्राइड से सिटी फॉरेस्ट होते हुए लाइट हाउस प्रोजेक्ट तक करीब 2.40 किलोमीटर लंबी मास्टर प्लान रोड बना रहा है। यह रोड 30 मीटर चौड़ी होगी। रोड की सेंट्रल लाइन से नपती की गई। नपती के दौरान आनंद केडिया का बंगला रोड की जद में आ गया। जांच में करीब 12.782 मीटर तक जमीन पर कब्जा सामने आने की बात कही गई।

इसके बाद नगर निगम ने बंगले के हिस्से को हटाने के लिए नोटिस जारी किया। पहला नोटिस 13 अप्रैल को दिया गया था। जवाब लेने के बाद भवन अधिकारी जोन-19 ने 10 जुलाई को बाउंड्रीवाल और कब्जे वाली जमीन पर बने हिस्से को हटाने का नोटिस जारी किया। इसके खिलाफ केडिया हाईकोर्ट चले गए।

हाईकोर्ट ने संयुक्त टीम से जांच कराने के निर्देश दिए। दोबारा नपती करने को कहा गया। साथ ही सभी पक्षों को सुनने के निर्देश दिए गए। इसके बाद प्रक्रिया पूरी की गई। 11 अगस्त को फिर अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया गया। इस नोटिस के खिलाफ केडिया दोबारा हाईकोर्ट पहुंच गए।

केडिया ने प्रशासन और निगम पर लगाए ये आरोप
केडिया ने मप्र शासन, इंदौर नगर निगम, निगमायुक्त, भवन अधिकारी जोन-19, कलेक्टर इंदौर, एसडीएम बिचौली हप्सी और टीएंडसीपी को पक्षकार बनाया। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। केडिया का कहना था कि संयुक्त निरीक्षण की रिपोर्ट उन्हें नहीं दी गई। उनका पक्ष भी नहीं सुना गया। केडिया ने कहा कि जमीन का कोई अधिग्रहण नहीं हुआ है।

उनका बंगला कुल 1.452 हेक्टेयर जमीन पर बना है। उन्होंने यह जमीन वर्ष 2017 में नियमों के तहत खरीदी थी। उनके मुताबिक बंगले के निर्माण के लिए टीएंडसीपी और नगर निगम से सभी जरूरी मंजूरियां ली गई थीं। उनका कहना था कि जमीन की पहले भी नपती हो चुकी है। वर्ष 2019 के रिकॉर्ड भी उनके पास मौजूद हैं।

याचिका में उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर नपती में बदलाव किया गया। उनका आरोप था कि रोड की लाइन को दक्षिण की जगह उत्तर दिशा में मोड़ा गया। इससे उनका परिसर रोड की सीमा में दिखाई देने लगा।

शासन और निगम ने कोर्ट में दिया यह जवाब
शासन और नगर निगम की ओर से कोर्ट में अलग पक्ष रखा गया। बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद 30 जुलाई को संयुक्त निरीक्षण किया गया था। शासन के मुताबिक निरीक्षण की रिपोर्ट केडिया के प्रतिनिधि को दी गई थी। रिपोर्ट पर उनके प्रतिनिधि के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।

शासन ने आरोप लगाया कि केडिया ने यह जानकारी हाईकोर्ट से छिपाई। नपती के दौरान उनके परिसर में सरकारी जमीन भी सामने आई है। आरोप है कि निजी जमीन के साथ सरकारी जमीन पर भी कब्जा किया गया है।

नगर निगम ने कोर्ट में कहा कि मास्टर प्लान की रोड पहले से तय है। उसी के अनुसार निर्माण कार्य किया जा रहा है। कार्रवाई में किसी तरह की दुर्भावना नहीं है। निगम के मुताबिक रोड का निर्माण पारदर्शी तरीके से जनहित में किया जा रहा है।

एमपी हाईकोर्ट बोला- केडिया ‘क्लीन हैंड’ से नहीं आए
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने मामले में 17 अगस्त को फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि केडिया की याचिका ‘क्लीन हैंड’ यानी साफ नीयत के साथ दाखिल नहीं की गई। कोर्ट के मुताबिक याचिका में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया। कोर्ट ने कहा कि संयुक्त दल के निरीक्षण की रिपोर्ट पर केडिया के प्रतिनिधि के हस्ताक्षर मौजूद हैं। इससे साफ है कि उन्हें रिपोर्ट की जानकारी थी। रिपोर्ट में सरकारी जमीन पर कब्जे की बात सामने आने का भी उल्लेख किया गया।

हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने कहा कि केडिया की ओर से दिए गए तर्क पहली नजर में आकर्षक जरूर लगते हैं। लेकिन उनमें पर्याप्त दम नहीं है।

केडिया पर 20 हजार रुपए का जुर्माना
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में लैटिन की एक कहावत का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा, “एक बात गलत तो सब गलत।” कोर्ट ने कहा कि यह कहावत केडिया की याचिका पर लागू होती है। कोर्ट के मुताबिक केडिया ने कुछ अहम तथ्यों को छिपाया। ऐसी स्थिति में उन पर ज्यादा जुर्माना लगाया जा सकता था। कोर्ट ने कहा कि न्याय से जुड़े जरूरी तथ्यों को छिपाना गंभीर बात है।

हालांकि, केडिया की ओर से कॉपी मिलने की बात स्वीकार करने के बाद कोर्ट ने 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि केडिया को राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।

फिर डबल बेंच पहुंचे केडिया
सिंगल बेंच के आदेश के बाद केडिया ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील की है। अपनी रिट अपील में उन्होंने कहा कि उनके प्रतिनिधि ने पंचनामा पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, उन्हें पंचनामा की कॉपी नहीं मिली थी।

केडिया ने आरोप लगाया कि कुछ बड़े अतिक्रमण को बचाने के लिए रोड की लाइन दूसरी ओर मोड़ी गई। इससे उनकी निजी जमीन नपती में आ गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया।

डबल बेंच से फिलहाल मिली अंतरिम राहत
डबल बेंच से केडिया को अंतरिम राहत मिली है। कोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही किसी भी तरह की बलपूर्वक कार्रवाई पर भी रोक लगाई गई है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षकारों से शॉर्ट रिप्लाय मांगा है। इसका जवाब 31 अगस्त तक देना था। हालांकि, समय की कमी के कारण उस दिन सुनवाई नहीं हो सकी।

अब मामले में अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है। अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि बंगले और कथित सरकारी जमीन से जुड़े विवाद में आगे क्या कार्रवाई होती है।

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