भारत की GDP ग्रोथ 7.8% पहुंची: अप्रैल-जून तिमाही में अनुमान से बेहतर प्रदर्शन; निवेश में 12% उछाल

नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून तिमाही में 7.8% की ग्रोथ दर्ज की है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, यह अर्थशास्त्रियों के 7.1% के अनुमान से ज्यादा है। निवेश और मैन्युफैक्चरिंग में तेजी से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।
पिछली तिमाही में GDP ग्रोथ 8.6% रही थी। हालांकि, यह आंकड़ा संशोधित किया गया है। RBI ने अप्रैल-जून तिमाही में 7% ग्रोथ का अनुमान लगाया था।
PM मोदी- लोगों की ताकत का नतीजा
GDP के 7.8% आंकड़े आने के बाद PM मोदी ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने X पर पोस्ट कर इसे बड़ी उपलब्धि बताया।
PM मोदी ने कहा- तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, सप्लाई चेन की दिक्कतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। भारत ने एक बार फिर अपनी आर्थिक मजबूती दिखाई है। यह देश के लोगों की सामूहिक ताकत का नतीजा बताया।
निजी निवेश में करीब 12% की बढ़ोतरी
अप्रैल-जून तिमाही में निजी निवेश में करीब 12% की बढ़ोतरी हुई। एक साल पहले इसी अवधि में यह ग्रोथ 5.8% थी। घरेलू मांग भी मजबूत रही। लोगों का निजी खर्च 7.1% बढ़ा। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 6.8% था।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 9.2%
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। इस सेक्टर की ग्रोथ 9.2% रही। एक साल पहले यह 8.3% थी। वित्तीय सेवाओं में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई। इस सेक्टर की ग्रोथ 12.1% रही। पिछले साल यह 8.8% थी।
GVA में 8.2% की बढ़ोतरी
अप्रैल-जून तिमाही में ग्रॉस वैल्यू एडेड यानी GVA 8.2% बढ़ा। GVA से अर्थव्यवस्था की वास्तविक गतिविधियों का बेहतर अंदाजा मिलता है। इसमें अप्रत्यक्ष टैक्स और सब्सिडी जैसे उतार-चढ़ाव वाले हिस्से शामिल नहीं होते।
GST और टैक्स कटौती से मांग को फायदा
|इस साल पहले किए गए GST और इनकम टैक्स में बदलाव से लोगों की खरीदारी बढ़ी। इससे घरेलू मांग को सहारा मिला। बैंक लोन की मांग भी मजबूत रही। जून तिमाही के अंत में कुल क्रेडिट ग्रोथ 18.3% रही।
महंगा कच्चा तेल बनी चिंता
GDP के अच्छे आंकड़ों के बावजूद अर्थव्यवस्था के सामने कुछ चुनौतियां हैं। इनमें कच्चे तेल की बढ़ती कीमत सबसे बड़ी चिंता है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
कमजोर रुपया और वैश्विक बाजार की सख्त परिस्थितियां भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।
कमजोर मानसून से भी खतरा
कमजोर मानसून भी अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का कारण है। भारत की सालाना बारिश का करीब 70% हिस्सा मानसून के दौरान आता है। कृषि और ग्रामीण आय के लिए मानसून बेहद अहम है। अप्रैल-जून तिमाही में कृषि क्षेत्र की ग्रोथ 3.6% रही।