बुंदेलखंड के सुनील की आवाज पहुंची बॉलीवुड: आंखों से नहीं देख सकते; ‘हनुमान अंश’ में मिला गाने का मौका

बुंदेलखंड के रहने वाले सुनील लोधी की आवाज अब देशभर में सुनी जा रही है। कभी वे तंबूरा लेकर स्थानीय स्तर पर भजन गाते थे। आज उनकी आवाज बॉलीवुड की फिल्म तक पहुंच चुकी है।
सुनील देख नहीं सकते हैं। वे कई साल से भजन और बुंदेली लोकगीत गा रहे हैं। शुरुआत में उनके गाने स्थानीय लोगों तक ही सीमित थे। बाद में उन्होंने ‘Bundeli Duniya’ के लिए भी गाने रिकॉर्ड किए।
एक भजन ने बदल दी जिंदगी
सुनील के लिए बड़ा बदलाव उनके भजन ‘मोरे संकट के कटैया’ से आया। इस गाने की एक साधारण रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। गाने को फिल्ममेकर और म्यूजिक प्रोड्यूसर पंकज VRK ने सुना। उन्हें सुनील की आवाज पसंद आई।
इसके बाद उन्होंने सुनील से संपर्क किया। इस भजन को ऑनलाइन अब तक 2.9 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। इसके बाद सुनील की पहचान बुंदेलखंड से बाहर भी बनने लगी।
पहली बार इंदौर से मुंबई पहुंचे
पंकज ने सुनील को मुंबई में रिकॉर्डिंग का मौका दिया। सुनील इसके लिए पहली बार इंदौर पहुंचे। इसके बाद वे मुंबई गए। मुंबई के साई बाबा स्टूडियो में उन्होंने करीब आठ गाने रिकॉर्ड किए। इनमें से ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ रिलीज हो चुका है।
सुनील ने बताया कि उन्होंने यह गाना तंबूरे के साथ गाया। उन्हें उस समय पता नहीं था कि उनकी आवाज किसी फिल्म का हिस्सा बनने वाली है।
‘हनुमान अंश’ में सुनाई दी आवाज
सुनील का गाना फिल्म ‘हनुमान अंश’ में शामिल किया गया है। फिल्म 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म भगवान हनुमान की भक्ति और संत नीम करोली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ी कहानी पर आधारित है। फिल्म को दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।इसके साथ ही फिल्म के भजनों को भी लोगों का ध्यान मिल रहा है।
सुनील बोले- लोगों के फोन आ रहे हैं
सुनील ने कहा कि उन्हें लगातार लोगों के फोन आ रहे हैं। लोग उन्हें गाना वायरल होने की बधाई दे रहे हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय भगवान और उन लोगों को दिया, जिन्होंने उनकी आवाज को आगे पहुंचाने में मदद की।
अब बड़े गायकों के साथ काम करना चाहते हैं
सुनील अब सिर्फ भजन तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे आगे और बेहतर गाने गाना चाहते हैं। उन्होंने जुबिन नौटियाल और अरिजीत सिंह के साथ काम करने की इच्छा जताई है।
सुनील की कहानी बताती है कि एक साधारण आवाज भी सही मंच मिलने पर दूर तक पहुंच सकती है। बुंदेलखंड में तंबूरे के साथ शुरू हुआ उनका सफर अब मुंबई के स्टूडियो और हिंदी सिनेमा तक पहुंच गया है।