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नागपंचमी और सावन सोमवार का विशेष संयोग: नागदेवता को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का करें जाप; जानिए कैसे करे शिवजी की पूजा

कई सालों बाद आज सावन सोमवार के साथ नागपंचमी का संयोग बना है। सोमवार के दिन नागपंचमी होने से आज का महत्व और बढ़ जाता है। हमारे धर्म ग्रंथों में नाग को विशेष स्थान प्राप्त है। नाग को शिवजी अपने कंठ में धारण करते है।

नागदेवता ने ही धरती को अपने मस्तक पर धारण किया हुआ है। आज के दिन उनकी पूजा करने से आपको कई विशेष फल मिल सकते है। आइए जानते है नागपंचमी की पूजा की विधि।

नाग पंचमी पूजा विधि 
नाग पंचमी वाले दिन सुबह उठकर स्‍नान करें। फिर साफ कपड़े पहने। इसके बाद अपने घर के ही मंदिर में नाग देवता की स्थापना करे। एक लकड़ी के पाटे पर उसे स्‍थापित करना सबसे उत्‍तम हो सकता है। अगर आपके पास चित्र नहीं है, तो आप मिट्टी से नाग की प्रतिमा स्वयं ही बनाकर उसकी पूजा कर सकते हैं। यदि आपके पास चित्र है तो 12 नागों को चंदन का तिलक और अक्षत अर्पित करें। यदि आप मिट्टी की प्रतिमा बना रहे हैं, तो उसी प्रतिमा को 12 बार तिलक अर्पित करें।

इस मंत्र का करें जाप 
इसके बाद नाग देवता को सुगंधित फूल अर्पित करें और अच्‍छा इत्र लगाएं। इसके बाद धूप और दीपक करें। अब आपको नाग देवता को भोग अर्पित करना है। इसके लिए मीठा दूध और लावा के साथ गुड़ का भोग लगाएं। सबसे आखिर में नाग मंत्र ‘प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले. ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः. ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः. ये च वापीतडगेषु तेषु सर्वेषु वै नमः’ का जाप करें और फिर नाग देवता का ध्‍यान करें।

असली सांप की पूजा जरूरी नहीं  
इस बात का खास ध्यान रखें कि आज के दिन गलती से भी आप किसी सांप को कष्ट ना पहुंचाए। अक्सर हम असली सांप की पूजा करने के कारण उसे डरा देते है। जरूरी नहीं है कि आप असली सांप की ही पूजा करे। आपके घर में विराजित नागदेवता या मंदिर में शिवलिंग के साथ बने नागदेवता की पूजा करने से भी आपको पूरा पुण्य मिलेगा।

रुद्राअष्टकम का पाठ जरूर करें
आज सोमवार और नागपंचमी साथ में है तो शिवलिंग की पूजा नाग देवता के साथ करे। ॐ नमः शिवाय का जाप करते हुए शिवजी का अभिषेक करें। उनक शृंगार करे। शिवलिंग पर धतूरा, बेल और बेलपत्र चढ़ाएं और शिवजी को शिवाअष्टक या रुद्राअष्टकम का पाठ जरूर सुनाएं।

 

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