दिल्ली में पीएम मोदी से मिले सुखबीर बादल: गठबंधन हुआ तो बदल सकता है समीकरण; केजरीवाल बोले- ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे

नई दिल्ली। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह बैठक संसद भवन परिसर में हुई, जिसके बाद पंजाब की राजनीति में अकाली दल और भाजपा के संभावित पुनर्गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पंजाब विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि दोनों दलों के बीच चुनावी रणनीति और सीटों को लेकर बातचीत आगे बढ़ सकती है।
केजरीवाल ने साधा निशाना
मोदी-बादल मुलाकात के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर कटाक्ष किया। उन्होंने सवाल उठाते हुए लिखा कि क्या अब “चंदा चोर पार्टी” और “बेअदबी पार्टी” साथ आने वाली हैं।

अकाली दल ने किया पलटवार
केजरीवाल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुखबीर बादल ने कहा कि 2022 में आम आदमी पार्टी ने पंजाब में कथित 20 हजार करोड़ रुपए के अवैध खनन को बंद करने का वादा किया था, लेकिन अब एनजीटी के आदेशों ने उन दावों की सच्चाई सामने ला दी है। उन्होंने कहा कि जनता को दी गई गारंटियां पूरी नहीं हुईं।
कांग्रेस ने भी दी प्रतिक्रिया
पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि उन्हें पहले से उम्मीद थी कि भाजपा और अकाली दल दोबारा करीब आ सकते हैं। हालांकि उन्होंने दावा किया कि इससे राज्य की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।
कभी पंजाब का सबसे मजबूत गठबंधन था
अकाली दल और भाजपा का राजनीतिक साथ 1996 में शुरू हुआ था। यह गठबंधन लगभग ढाई दशक तक चला और 1997, 2007 तथा 2012 में दोनों दलों ने मिलकर सरकार बनाई। उस समय अकाली दल ग्रामीण और पंथक क्षेत्रों में मजबूत था, जबकि भाजपा शहरी हिंदू मतदाताओं के बीच प्रभाव रखती थी।

2020 में अलग हुए थे दोनों दल
कृषि कानूनों के मुद्दे पर 2020 में अकाली दल ने भाजपा से नाता तोड़ लिया था। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां अलग-अलग मैदान में उतरीं और उनका प्रदर्शन कमजोर रहा। इस राजनीतिक बदलाव का सबसे बड़ा फायदा आम आदमी पार्टी को मिला, जिसने भारी बहुमत के साथ सरकार बनाई।
फिर गठबंधन हुआ तो बदल सकता है समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा और अकाली दल आगामी विधानसभा चुनाव से पहले फिर साथ आते हैं, तो पंजाब की राजनीति में मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। इससे आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों के लिए चुनौती बढ़ सकती है।