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BCCI का नया फिटनेस नियम: 1200 मीटर की दौड़ 5.20 मिनट में पूरी करनी होगी; ब्रोंको टेस्ट का समय घटा

भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के लिए फिटनेस टेस्ट अब पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण होने वाला है। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद BCCI ने खिलाड़ियों के फिटनेस मानकों को और कड़ा करने का फैसला किया है। भारतीय खिलाड़ियों को फिटनेस साबित करने के लिए दो अहम टेस्ट देने होते हैं। इनमें ब्रोंको टेस्ट और 2 किलोमीटर रनिंग टेस्ट शामिल हैं।

ब्रोंको टेस्ट का समय घटाया गया
पहले ब्रोंको टेस्ट पूरा करने के लिए लगभग 6 मिनट का समय दिया जाता था, लेकिन अब खिलाड़ियों को 1200 मीटर की यह दौड़ 5 मिनट 15 सेकेंड से 5 मिनट 20 सेकेंड के भीतर पूरी करनी होगी।

2km दौड़ भी जरुरी
ब्रोंको टेस्ट के तुरंत बाद खिलाड़ियों को 2 किलोमीटर की दौड़ 9 से 10 मिनट के अंदर पूरी करना अनिवार्य होगा। इससे खिलाड़ियों की स्पीड और स्टैमिना दोनों की कड़ी जांच होगी।

पहले खिलाड़ियों पर ज्यादा फिटनेस दबाव नहीं था
2023 वनडे वर्ल्ड कप, 2024 टी20 वर्ल्ड कप और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान भारतीय टीम का इंजरी मैनेजमेंट काफी सफल माना गया था। उस समय खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना उनकी फिटनेस बनाए रखने की रणनीति अपनाई गई थी।

यो-यो टेस्ट सीमित अंतराल पर होता था
यो-यो टेस्ट आमतौर पर छह महीने में एक बार या फिर चोट से वापसी के दौरान कराया जाता था। इससे खिलाड़ियों पर अतिरिक्त फिटनेस दबाव नहीं पड़ता था।

अब बार-बार होंगे फिटनेस टेस्ट
अब CoE में खिलाड़ियों से यो-यो टेस्ट, ब्रोंको टेस्ट और 2Km रनिंग टेस्ट पहले की तुलना में अधिक बार कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों की फिटनेस को लगातार मॉनिटर करना बताया जा रहा है।

विशेषज्ञों ने जताई चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इंजरी से बचाव पर ध्यान देने के बजाय जरूरत से ज्यादा वर्कलोड बढ़ाया गया, तो खिलाड़ी मानसिक और शारीरिक थकान (बर्नआउट) का सामना कर सकते हैं।

चोट का खतरा भी बढ़ सकता है
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार सख्त ट्रेनिंग और बार-बार फिटनेस टेस्ट से खिलाड़ियों में चोट लगने का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए फिटनेस सुधार और वर्कलोड मैनेजमेंट के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।

BCCI का उद्देश्य खिलाड़ियों की फिटनेस, स्टैमिना और रिकवरी क्षमता को बेहतर बनाना है, लेकिन लगातार सख्त टेस्ट खिलाड़ियों के वर्कलोड को लेकर नई बहस भी खड़ी कर रहे हैं।

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