मानसून में भी नहीं रुका अवैध खुदाई : भिंड में रेत माफियाओं का राज; रातभर चलता है अवैध कारोबार

भिंड। जिले की लहार तहसील के असवार थाना क्षेत्र का बरहा गांव इन दिनों अवैध रेत कारोबार का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। सिंध नदी से रेत के अवैध उत्खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आरोप है कि रेत माफिया रात के अंधेरे में भारी मात्रा में रेत निकालकर गांव के आसपास खाली खेतों और बीहड़ों में डंप कर रहे हैं।
रात में नदी से निकाली जाती है रेत
स्थानीय लोगों के अनुसार माफिया देर रात सिंध नदी में मशीनों और वाहनों की मदद से रेत निकालते हैं। इसके बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों से रेत को बरहा गांव के पास अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया जाता है। कई खाली खेतों को अस्थायी स्टॉक यार्ड में बदल दिया गया है, जहां बड़ी मात्रा में रेत जमा की जा रही है।
बीहड़ों में बनाए गए अवैध डंपिंग पॉइंट
ग्रामीणों का कहना है कि नदी किनारे के बीहड़ों में कई जगह अवैध डंपिंग पॉइंट तैयार किए गए हैं। यहां जमा की गई रेत को बाद में ऊंचे दामों पर बाजार में बेचा जाता है। इससे शासन को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
जलीय जीवों पर भी पड़ रहा असर
मानसून के दौरान सिंध नदी में जलीय जीवों का प्रजनन काल चलता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस समय नदी से रेत निकालने से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है और जलीय जीवों के आवास प्रभावित होते हैं। इसी कारण राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मानसून अवधि में नदी से रेत खनन पर पूरी तरह रोक लगा रखी है।
एनजीटी की रोक के बावजूद जारी गतिविधियां
एनजीटी के स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद बरहा गांव क्षेत्र में अवैध खनन की गतिविधियां जारी रहने से प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय लगातार वाहन चलते दिखाई देते हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खनिज विभाग से मांग की है कि बरहा गांव और सिंध नदी क्षेत्र में संयुक्त अभियान चलाकर अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगाई जाए। साथ ही अवैध स्टॉक यार्डों को जब्त कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि नदी और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।